रेणुकूट के शहंशाह ने कूड़ेदान में तड़पती जिंदगी को दिया सहारा, टीम निशा की मानवता देख जनपद ने किया सलाम

पूर्वा टाइम्स – समाचार

रेणुकूट (सोनभद्र)। मानव सेवा ही माधव सेवा है।इस महान उक्ति को धरातल पर उतारना हर किसी के सामर्थ्य में नहीं होता, लेकिन औद्योगिक नगर रेणुकूट के टीम निशा बबलू सिंह विजय प्रताप सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने इसे अपनी कार्यशैली से सच कर दिखाया है। जहाँ आधुनिक समाज अक्सर मानसिक रूप से विक्षिप्त और उपेक्षित लोगों से किनारा कर लेता है, वहीं इस टीम ने निस्वार्थ भाव से सेवा की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे जनपद का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हृदय विदारक मामला एक विक्षिप्त महिला से जुड़ा है जो महीनों से रेणुकूट की सड़कों पर भटक रही थी। नियति का क्रूर प्रहार तब हुआ जब सड़क किनारे सोते समय एक अज्ञात वाहन ने उसके दोनों पैरों को कुचल दिया। वह असहाय महिला कई घंटों तक अपने टूटे पैरों के साथ कूड़े के ढेर के पास पड़ी दर्द से कराहती रही। विडंबना यह रही कि हजारों लोग वहाँ से गुजरे, लेकिन किसी का भी दिल उस मर्मस्पर्शी चीख को सुनकर नहीं पसीजा। समाज की यह संवेदनहीनता मानवता के चेहरे पर एक गहरा दाग थी। जैसे ही इस दर्दनाक हादसे की भनक टीम निशा को लगी, वे बिना एक पल की देरी किए मौके पर पहुँचे। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत 112 पुलिस को सूचना दी और अपनी व्यक्तिगत देखरेख में महिला को एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुँचाया। वर्तमान में उक्त महिला का इलाज सरकारी अस्पताल में जारी है, सोनभद्र जनपद में चार-चार विधायक होने के बावजूद, क्षेत्र में इस टीम की लोकप्रियता किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि से कहीं अधिक देखी जा रही है। स्थानीय जनता का स्पष्ट कहना है कि हमें ऐसे ही जुझारू और संवेदनशील प्रतिनिधियों की आवश्यकता है जो संकट के समय एसी कमरों से बाहर निकलकर धरातल पर खड़े हों। जो समर्पण टीम निशा और बबलू सिंह दिखा रहे हैं, वैसा उदाहरण वर्तमान राजनीति में दुर्लभ है। विजय प्रताप सिंह उर्फ डब्लू सिंह की इस सक्रियता को उनके पारिवारिक संस्कारों और मर्यादा के प्रति निष्ठा के रूप में देखा जा रहा है। उनके लिए सेवा की कोई सीमा नहीं है‌। चाहे वह कोई लाचार इंसान हो या सड़क पर बीमार पड़ा बेजुबान जानवर। शहंशाह के नाम से मशहूर डब्लू सिंह के लिए पीड़ित की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि हर समर्थ व्यक्ति अपने संस्कारों का इसी तरह निर्वहन करे, तो कोई भी असहाय सड़कों पर दम तोड़ने को मजबूर नहीं होगा। आज के स्वार्थपूर्ण युग में जहाँ संवेदनाएं दम तोड़ रही हैं, वहाँ टीम निशा और डब्लू सिंह समाज के लिए उम्मीद की एक उज्ज्वल किरण हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि मरते हुए को दूर से देखना कायरता है, और हाथ थामकर उसे जीवन देना ही असली बहादुरी और सच्चे संस्कार हैं।

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