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लू के कहर से बदला स्कूल टाइम, अब सुबह 7:30 से दोपहर 12 बजे तक लगेंगी कक्षाएं.पूर्वा टाइम्स – समाचार सोनभद्र में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। जिलाधिकारी बी.एन. सिंह ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालयों के समय में तत्काल प्रभाव से बदलाव का आदेश जारी किया है। नए आदेश के अनुसार, जनपद के सभी परिषदीय, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का संचालन अब सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक किया जाएगा। तेज धूप और लू का बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, इसलिए एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। सुबह के समय तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है, जिससे बच्चों को गर्मी से राहत मिलेगी और वे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर सकेंगे। दोपहर की बढ़ती गर्मी और लू से बचाव के लिए स्कूलों का समय कम किया गया है, ताकि बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े।जिलाधिकारी ने सभी विद्यालय प्रबंधनों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। बता दे कि बच्चों को पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और आवश्यक सावधानियां बरतने की ज़रूरत है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखने की ज़रूरत है और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने के लिए एहतिहात बरतनी चाहिए। प्रदेश के अन्य जिलों के साथ सोनभद्र जिले में तापमान लगातार बढ़ रहा है और मौसम विभाग द्वारा लू चलने की संभावना जताई जा रही है। जिला प्रशासन का यह कदम बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को देगा नई दिशा.पूर्वा टाइम्स – समाचारसोनभद्र। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (संविधान संशोधन अधिनियम, 2023) को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की गई। इस अवसर पर डॉ. गीता जैसवाल एवं डॉ. दीप्ति सिंह ने कहा कि यह अधिनियम भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण की मांग को पूरा करने के लिए यह कानून एक निर्णायक पहल है। वक्ताओं ने बताया कि इस अधिनियम के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। इससे न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नीति निर्धारण में उनके दृष्टिकोण को भी मजबूती मिलेगी। वर्तमान में भारतीय संसद में महिलाओं की भागीदारी लगभग 15 प्रतिशत है, जो इस अधिनियम के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद बढ़कर लगभग 33 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, यह आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। इसके लिए देश में अगली जनगणना कराना आवश्यक है। जनगणना के बाद परिसीमन (निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन) की प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात ही यह व्यवस्था प्रभावी हो सकेगी। इस कारण इसके लागू होने में कुछ समय लग सकता है। अधिनियम के अनुसार यह आरक्षण प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए लागू रहेगा, जिसे आवश्यकता के अनुसार आगे भी बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, आरक्षित सीटों का रोटेशन प्रत्येक परिसीमन के बाद किया जाएगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके। इस कानून में अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। इन वर्गों के लिए आरक्षित सीटों में से एक-तिहाई सीटें उनकी महिलाओं के लिए निर्धारित होंगी। हालांकि, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग उप-कोटा का प्रावधान नहीं किया गया है, जिस पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है। इस अवसर पर पंचायती राज अधिकारी नमिता शरण, जिला दिव्यांगजन अधिकारी विद्या देवी, एनआरएलएम से सरिता सिंह, डीपीओ विनीत सिंह तथा जिला अल्पसंख्यक अधिकारी सुधांशु शेखर शर्मा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने उम्मीद जताई कि यह अधिनियम महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी और अधिक समावेशी बनाएगा।
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