21 दिवसीय ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन कार्यक्रम का शुभारंभ, कुलपति ने दिया सर्वांगीण विकास का मंत्र

गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नवप्रवेशित स्नातक छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित 21 दिवसीय ओरिएंटेशन एवं इंडक्शन कार्यक्रम का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा रहीं। कार्यक्रम स्थल पर आगमन पर अधिष्ठाता छात्र मामले प्रो. जय प्रकाश ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इसके उपरांत कुलपति सहित सभी अधिष्ठाताओं एवं विभागाध्यक्षों ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा मां सरस्वती एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अधिष्ठाता छात्र मामले प्रो. जय प्रकाश ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से परिचित कराया।
अपने प्रेरक संबोधन में कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को उत्कृष्ट रैंक प्राप्त कर एमएमएमयूटी में प्रवेश पाने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रतिस्पर्धा पहले की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे में केवल प्रवेश प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर कठिन परिश्रम, अनुशासन और सीखने की ललक ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय में उपलब्ध प्रत्येक अवसर का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया।
कुलपति ने कहा कि उद्योग जगत की बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। तकनीकी दक्षता के साथ-साथ संचार कौशल, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, समस्या समाधान और व्यक्तित्व विकास जैसे सॉफ्ट स्किल्स भी आज समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इन कौशलों के विकास पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।
उन्होंने विश्वविद्यालय के मजबूत एलुमनाई नेटवर्क का उल्लेख करते हुए कहा कि एमएमएमयूटी के पूर्व छात्र देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों एवं उद्योगों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह सशक्त एलुमनाई नेटवर्क विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने छात्रों से अपने वरिष्ठ विद्यार्थियों का सम्मान करने, उनसे सीखने तथा उनके अनुभवों का लाभ उठाने की अपील की।
प्रो. शर्मा ने विद्यार्थियों से अपनी रुचियों एवं क्षमताओं की पहचान करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में कोई न कोई विशेष प्रतिभा अवश्य होती है। आवश्यकता इस बात की है कि उसे पहचाना जाए, निरंतर निखारा जाए और उसे अपनी पहचान बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आज के समय में संस्थानों और उद्योगों को ऐसे युवा चाहिए जो बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हों। इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल, सांस्कृतिक, साहित्यिक, तकनीकी तथा सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक गतिविधि जीवन में कुछ नया सीखने और व्यक्तित्व को समृद्ध बनाने का अवसर प्रदान करती है।
इस अवसर पर अधिष्ठाता प्रो. वी. के. गिरी, प्रो. वी. के. मिश्र, प्रो. आर. के. यादव, प्रो. जय प्रकाश, प्रो. डी. के. द्विवेदी, प्रो. जीउत सिंह, प्रो. बी. के. पांडेय, प्रो. ए. के. मिश्र तथा विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एन. सिंह, डॉ. रविशंकर, प्रो. राकेश कुमार, प्रो. आर. के. चौहान, प्रो. डी. एस. सिंह एवं प्रो. प्रभाकर तिवारी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। नियंता प्रो. एस. के. सोनी, परीक्षा नियंत्रक प्रो. शिव प्रकाश तथा अध्यक्ष सूचना प्रौद्योगिकी संसाधन केंद्र (आईटीआरसी) प्रो. एस. पी. सिंह एवं ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रमुख प्रो. वी. के. द्विवेदी ने भी विश्वविद्यालय की विभिन्न सुविधाओं एवं छात्र हित से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अभिजित मिश्र ने किया।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के अंतर्गत नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक विभागों, कार्यशालाओं, केंद्रीय पुस्तकालय, सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र, स्टेडियम तथा अन्य केंद्रीय सुविधाओं का भ्रमण भी कराया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।








