राप्ती नदी का बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों के लिए बना खतरा
लाखों की लागत से बना रेगुलेटर प्लेटफॉर्म धंसा, तटबंध की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
पूर्वा टाइम्स- डॉ अनिल गौतम
गोरखपुर। बड़हलगंज ब्लॉक क्षेत्र में राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ते ही बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी खामी सामने आ गई है। बाढ़ खंड दो सिंचाई विभाग द्वारा वर्षों पूर्व 8.740 किलोमीटर लंबाई में बनाए गए कंसासुर खुटभार रिंग तटबंध पर ददरी गांव के समीप स्थित रेगुलेटर के सामने लाखों रुपये की लागत से निर्मित पक्का प्लेटफॉर्म धंस गया है। बरसात के बीच हुई इस घटना से क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत फैल गई है और तटबंध की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। तटवर्ती ग्रामीण पहलवान राहुल यादव रामानंद यादव रामाकांत यादव रामबदन यादव सतेंद्र सिंह भारतेन्दु सिंह अयोध्या सिंह राधेश्याम पांडेय शिवकरन रायबहादुर और राजू यादव का कहना है कि जिस प्लेटफॉर्म को बाढ़ के दबाव को झेलने के लिए बनाया गया था वही पहली बड़ी परीक्षा में धंस गया। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि अब नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी जल्द ही प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में मरम्मत कार्य कर पाना भी बेहद कठिन हो जाएगा। यदि दबाव बढ़ने से रेगुलेटर या तटबंध को नुकसान पहुंचा तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके का निरीक्षण नहीं किया है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल तकनीकी टीम भेजकर स्थिति का आकलन कराने और तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।ताकि किसी संभावित बड़े खतरे को समय रहते टाला जा सके। इस संबंध में सहायक अभियंता अपराजिता सिंह ने कहा मामला मेरी जानकारी में नहीं है। मैं तत्काल मौके की जांच करवाती हूं। मेरे कार्यकाल में प्लेटफॉर्म का निर्माण या मरम्मत नहीं हुई है। यह कार्य मेरे आने से पहले कराया गया था। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी जल्द ही धंसे प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकता है। ऐसे में मरम्मत की संभावनाएं सीमित हो जाएंगी। यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए और तटबंध को कोई क्षति पहुंची तो उससे जुड़े गांवों और हजारों लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी।








