जनस्वास्थ्य रक्षको ने अवशेष, परिलाभ एवं पेंशन भुगतान के लिए शासन से की मांग

गोरखपुर। भारतीय जन स्वास्थ्य रक्षक सर्ब मंगल सेवा संस्थान द्वारा एक प्रेस वार्ता कर शासन को अवगत किया की जनस्वास्थ्य रक्षको के अवशेष एवं परिलाभ एवं पेंसन भुगतान के सम्बन्ध में जनस्वास्थ्य रक्षक योजना विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वितपोषित भारत सरकार से संचालित 1977 से 1982 में विधिवत न्यायपंचायत एवं स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति की गई जिसमे 3 माह का प्रशिक्षण प्राप्त 30 वर्ष की उम्र में उवर्ष का बान्ड भरवाया गया की आप 3 वर्ष तक अन्यर्त कार्य पर नही जा सकते हैं। हम लोग नियुक्ति के 22 वर्षों तक सेवारत रहे हैं, परन्तु खेद है कि बिना सुचना बिना संज्ञान में लिए आकाश्मात निलम्बित कर दिया गया (2002) में।
हम लोग जनस्वास्थ्य के रूप में सामान्य विमारियों से लेकर असाध्य बिमारियो का ईलाज करते चले आ रहे है। गाँव का स्वास्थ्य निगरानी तथा संकामक तथा संचारी रोगो के जड़ से मिटाने का काम किये है। गांव मे कोई भी महामारी न आने पाये जैसे चेचक बडी माता, मलेरिया, फैलेरिया, तथा कुष्ट रोगो का उन्मुनल किये है। पोलियो कोरोना सिविर सेवा करते है। संक्रामक बिमारीयो को रोकने हेतू शासन के निर्देश पर हमेशा तैयार रहते है गाँव मे साफ सफाई करते चले आ रहे है। तथा का लगा कर
योजना निलम्बन के बाद मा० उच्चन्यालय का आदेश 24.07.2013 प्राप्त हुआ परन्तु शासन मे कोई कार्यवाही का पता नहीं चला पुनः शासन से विनिमिति करण आदेश 2022 जारी हुआ हम लोग मुख्य जिलाचिकित्सा अधिकारी द्वारा विनिमिति करण का पालन हुआ कार्यवाही कर शासन में भेजा गया है। शासन से सर्वे का कार्य 2018 मे किया गया परन्तु आज तक हम लोगो को कोई सूचना नही मिला सन् 2002 योजना निलम्बन के बाद सुप्रीम कोर्ट का दिशा निर्देश मिला उस पर भी भारत सरकार का कोई कार्यवाही का पता नही चला।
जनवरी 2025 मे पेपर मे आदेश आया की जो कर्मी 20 वर्ष 15 वर्ष 10 वर्ष किसी भी सरकारी विभाग मे सेवारत रहे है उन्हे निश्चित पेंसन दिया जायेगा उस पर भी सरकार का ध्यान का पता नही है। जब कि वर्तमान में 13.04.2026 विश्वस्वाथ्य संगठन (WHO) का आदेश साशन मे भुगतान हेतू लम्बीत पड़ा है।
अतः पुनः श्रीमान जी से निवेदन है कि 22 वर्ष सेवारत रहने के बाद इस वृद्धा अवस्था में सड़को पर लवारिस छोड़ दिया गया है हम लोग भुखे नन्गे सड़को पर भटक रहे है।
अतः आपसे निवेदन है कि पुराना अवशेष परिलाभ कि बात अलग है परन्तु आज तक पेंसन भी नही मिलता है। जब कि मा० उच्चन्यालय एंव सर्वोच्च न्यायालय का आदेश शासन मे लंबित पड़ा है।
अतः आप जैसे यजश्वी प्रधानमंत्री होते हूए न्याय का पालन नही हो रहा है। अतः आप से निवेदन है कि आप ऐसा बाध्यकारी आदेश पारित करे कि आप के आदेश के अनुपालन मे शासन से पैसा तथा पेंसन मिलता रहे वर्तमान मे सुप्रीम कोर्ट का रूलींग आया है कि लम्बे समय तक कार्य लिया तो पद दुथायी माना जायेगा ।

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