डा विनायक ने प्रेस वार्ता कर हंटा वायरस के विषय पर लोगो को जागरूक कर जानकारी दी

पूर्वा टाइम्स अखिलेश कुमार
गोरखपुर। करीब साढ़े छह साल पहले दुनिया ने कोरोना वायरस यानी कोविड-19 के बारे में पहली बार सुना था। शुरुआत में यह सिर्फ एक देश तक सीमित लगा, लेकिन कुछ ही महीनों में पूरी दुनिया प्रभावित हो गई। कोविड की यादें अभी भी लोगों के मन में ताजा हैं, और इसी बीच अब एक क्रूज़ शिप पर हुए हंटा वायरस के मामलों ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
यह घटना “MV Hondius” नाम के एक क्रूज़ शिप से जुड़ी है। यह जहाज 1 अप्रैल को अर्जेंटीना से रवाना हुआ था। जहाज पर 114 यात्री और 61 क्रू सदस्य मौजूद थे। यह 35 दिनों की यात्रा थी, जो दक्षिण अटलांटिक द्वीपों से होकर पश्चिम अफ्रीका की तरफ जा रही थी। यात्रा के दौरान जहाज पर हंटा वायरस के मामले सामने आए। 11 अप्रैल 2026 को एक डच यात्री की मौत हो गई। बाद में उनकी पत्नी को इलाज के लिए उतारा गया, लेकिन 26 अप्रैल को दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल में उनकी भी मौत हो गई। 2 मई को जहाज पर एक तीसरे यात्री की भी मौत हुई। कुल 11 मामले सामने आए हैं, जिनमें 3 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है।
कोविड-19 के विपरीत हंटावायरस सामान्यतः एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस जहाज पर हंटा वायरस का “Andes strain” नाम का दुर्लभ प्रकार मिला है। यह हंटा वायरस का ऐसा प्रकार है जिसमें करीबी संपर्क में इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की संभावना है। इसके बाद संक्रमित या संपर्क में आए यात्रियों को अलग-अलग देशों में विशेष उड़ानों से भेजा गया। ब्रिटेन, अमेरिका और दूसरे देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां अब उन लोगों की पहचान और जांच कर रही हैं जो इन यात्रियों के संपर्क में आए थे। कुछ लोगों को छह हफ्तों तक निगरानी में रखने की सलाह दी गई है।
क्रूज़ पर कार्यरत दो भारतीय नागरिक, जो क्रू मेंबर के रूप में तैनात थे, दोनों भारतीय यात्रियों को एहतियात के तौर पर मेडिकल निगरानी में रखा गया है। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों के तहत निगरानी और क्वारंटीन के लिए नीदरलैंड भेजा गया है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार उनमें गंभीर लक्षण नहीं पाए गए हैं और उनकी हालत स्थिर है। भारत सरकार लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि फिलहाल यह कोई वैश्विक महामारी जैसी स्थिति नहीं है। WHO ने देशों से सतर्क रहने, निगरानी बढ़ाने और लोगों को सही जानकारी देने की अपील की है।
अब यह समझना जरूरी है कि हंटा वायरस क्या है। हंटा वायरस कोई एक वायरस नहीं, बल्कि वायरस का एक समूह है। यह मुख्य रूप से चूहों और दूसरे छोटे जानवरों में पाया जाता है। इंसान संक्रमित चूहों के पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से संक्रमित हो सकता है। जब ये सूख जाते हैं और इनके छोटे कण हवा में फैलते हैं, तब सांस के जरिए संक्रमण हो सकता है। हंटावायरस की पहली पहचान कोरियन युद्ध के दौरान हुई थी। उस समय यह बीमारी हंटान नदी के आसपास तैनात सैनिकों में काफी आम थी। इसी वजह से इस वायरस का नाम “हंटावायरस” रखा गया। बाद में 1993 में अमेरिका में इसके बड़े प्रकोप ने दुनिया का ध्यान खींचा था जिसमें कुल 33 मामलों की पुष्टि हुई थी, जिनमें 17 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई थी। 2006 से 2008 के दौरान चेन्नई और वेल्लोर में बुखार और किडनी की समस्या के कुछ मामले सामने आए थे, जिनकी जांच में हंटावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी।
हंटा वायरस से मुख्य रूप से दो प्रकार की बीमारियाँ होती हैं। हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) और हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS)। HFRS में मुख्य रूप से किडनी प्रभावित होती है। इसमें किडनी में सूजन, पेशाब में अधिक प्रोटीन आना तथा पेशाब में खून आना जैसे लक्षण पाए जाते हैं। इस बीमारी में मृत्यु दर 1% से लेकर 15% तक हो सकती है। वहीं HPS की शुरुआत सामान्य फ्लू जैसे लक्षणों – बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द से होती है। इसके बाद अचानक सांस लेने में गंभीर परेशानी हो सकती है। HPS अधिक गंभीर माना जाता है और इसकी मृत्यु दर लगभग 30% से 60% तक बताई गई है। हंटावायरस संक्रमण की पुष्टि मुख्य रूप से लैब जांच के माध्यम से की जाती है। इसके लिए RT-PCR जांच का उपयोग किया जाता है। वर्तमान समय में हंटावायरस संक्रमण के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीज का उपचार मुख्य रूप से सहायक (Supportive) होता है, जिसमें लगातार चिकित्सकीय निगरानी रखी जाती है तथा सांस, हृदय और किडनी से जुड़ी जटिलताओं का समय पर उपचार किया जाता है।
मैं यह साफ करना चाहता हूँ कि यह वायरस कोविड-19 की तरह तेजी से नहीं फैलता। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूरी है।
बचाव के लिए कुछ जरूरी बातें:

  1. घर और आसपास सफाई रखें।
  2. चूहों को घर में आने से रोकें।
  3. पुराने बंद कमरे या स्टोर रूम साफ करते समय मास्क और दस्ताने पहनें।
  4. चूहों की गंदगी को सीधे झाड़ू से साफ न करें। पहले उस जगह पर फिनाइल या कीटाणुनाशक डालें।
  5. तेज बुखार, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
    हम सभी से अपील करते हैं कि अफवाहों से बचें और केवल स्वास्थ्य विभाग या सरकारी एजेंसियों की सही जानकारी पर भरोसा करें।

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