विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026- रीजेंसी हॉस्पिटल गोरखपुर का हेल्थ अलर्ट:तंबाकू से बढ़ रहा ओरल कैंसर का खतरा
गोरखपुर। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर रीजेंसी हॉस्पिटल गोरखपुर के डॉक्टरों ने गोरखपुर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते तंबाकू सेवन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। डॉक्टरों के अनुसार,गुटखा,खैनी, पान मसाला,बीड़ी और सिगरेट का बढ़ता इस्तेमाल लोगों को तेजी से मुंह,गले और फेफड़ों के कैंसर के साथ-साथ हृदय रोगों की ओर धकेल रहा है। खासतौर पर युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू सेवन तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। गोरखपुर जिले में किए गए एक अध्ययन में पुरुषों में तंबाकू सेवन की दर करीब 31.1% और महिलाओं में 6.1% पाई गई। अध्ययन में यह भी पाया गया कि गुटखा और खैनी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले तंबाकू उत्पाद हैं।देर से पहचान बन रही जानलेवारीजेंसी हॉस्पिटल गोरखपुर के विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वांचल व गोरखपुर के आसपास में ओरल कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गोरखपुर,देवरिया,कुशीनगर, महाराजगंज और बस्ती मंडल से बड़ी संख्या में ऐसे मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं,जिनमें ओरल प्री-कैंसर और कैंसर की समस्या पाई जा रही है। लोग अक्सर मुंह के छाले,सफेद दाग,जलन या मुंह कम खुलने जैसी शुरुआती समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं,जिसके कारण मरीज एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं। लोगों में यह गलत धारणा है कि सिर्फ सिगरेट नुकसान करती है,जबकि खैनी और गुटखा भी उतने ही खतरनाक हैं। लगातार तंबाकू सेवन मुंह की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाता है और कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र के युवाओं में भी ओरल कैंसर के मामले बढ़े हैं, जो बेहद चिंता का विषय है। भारत दुनिया में ओरल कैंसर के सबसे अधिक मामलों वाले देशों में शामिल है और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्मोकलेस टोबैको का व्यापक इस्तेमाल माना जाता है। गोरखपुर में हुए एक सर्वे में यह भी सामने आया कि बड़ी आबादी को ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षणों और जोखिमों की पर्याप्त जानकारी नहीं है।डॉक्टरों की चेतावनीरीजेंसी हॉस्पिटल गोरखपुर के विशेषज्ञ डॉ. रूपेश कुमार सिंह,कंसल्टेंट – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ने कहा, “आज सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि तंबाकू की लत अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कम उम्र के युवा भी तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। गुटखा, खैनी,पान मसाला और सिगरेट जैसे उत्पाद धीरे-धीरे मुंह की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाते हैं और ओरल कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं। लोग अक्सर मुंह के छाले,सफेद या लाल दाग,जलन, आवाज में बदलाव या मुंह कम खुलने जैसी शुरुआती समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं,जबकि यही लक्षण आगे चलकर गंभीर बीमारी का संकेत बन सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जागरूकता की कमी और समय पर जांच न कराना है। अगर किसी व्यक्ति को मुंह में लंबे समय तक छाले, सफेद दाग,जलन, निगलने में परेशानी या मुंह खोलने में दिक्कत महसूस हो रही है,तो तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और तंबाकू छोड़ना ही ओरल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।”








