सोनभद्र के औद्योगिक अंचल में सेवा की नई परिभाषा लिख रही टीम निशा बबलू सिंह

पूर्वा टाइम्स – घनश्याम पाण्डेय
सोनभद्र – औद्योगिक चकाचौंध और विशाल मशीनों की गूँज के बीच बसे रेणुकूट क्षेत्र में जहाँ अक्सर मानवीय संवेदनाएं पीछे छूट जाती हैं, वहाँ ‘टीम निशा बबलू सिंह’ सेवा और समर्पण का एक नया अध्याय लिख रही है। आज यह नाम पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में, जहाँ लोग अपनों को भूलते जा रहे हैं, यह टीम अनजान लोगों के दुःख-दर्द को अपना समझकर उनके साथ मजबूती से खड़ी है। रेणुकूट स्टील परियोजना और कनोरिया परियोजना जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के आसपास रहने वाले गरीब, श्रमिक और पीड़ित वर्ग के लिए यह टीम किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। औद्योगिक दुर्घटना हो या कोई निजी विपदा, स्थानीय लोगों का कहना है कि बबलू सिंह की टीम बिना घड़ी देखे, दिन-रात मदद के लिए तत्पर रहती है। इस सेवा यात्रा में शिव प्रताप सिंह का योगदान अनुकरणीय है। उन्होंने मजदूरों के हितों के लिए न दिन देखा, न रात और न ही मौसम की मार। कठिन से कठिन परिस्थितियों और विषम मौसम में भी उनकी मौके पर उपस्थिति पीड़ितों को ढांढस बंधाती है। मजदूरों के लिए उनकी कोई सीमा नहीं है; वे हर उस स्थान पर पहुँचते हैं जहाँ मानवता को सहायता की आवश्यकता होती है। टीम के प्रमुख स्तंभ अभय प्रताप सिंह इस पूरी मुहिम को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। किसी भी अप्रिय घटना की सूचना मिलते ही उनकी त्वरित कार्रवाई और मौके पर ही समस्या का निस्तारण करने की क्षमता उनकी विशिष्ट पहचान बन चुकी है। उनकी इस सक्रियता ने क्षेत्र के युवाओं के बीच समाज सेवा के प्रति एक नया नजरिया विकसित किया है। आज स्थानीय जनता इस टीम को केवल एक सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि अपने परिवार का अभिन्न हिस्सा मानती है। पूर्वांचल के इस चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में, जहाँ संसाधनों का अक्सर अभाव रहता है, ऐसी टीमों का सक्रिय होना यह सिद्ध करता है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। सोनभद्र के औद्योगिक विकास के साथ-साथ यदि इस तरह के सामाजिक सरोकार भी जीवित रहते हैं, तो निस्संदेह क्षेत्र का भविष्य और भी उज्ज्वल और सुरक्षित होगा। टीम निशा बबलू सिंह का यह प्रयास समाज के अन्य सक्षम नागरिकों के लिए भी एक प्रेरणा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *