सोनभद्र के जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान एवं औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण और संवर्धन पर कार्य करेगा CSIR-NBRI लखनऊ –
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से CSIR-NBRI के वैज्ञानिकों ने की मुलाकात, जनजातीय आजीविका संवर्धन एवं स्थानीय जैव संसाधनों के समुचित उपयोग पर हुई चर्चा –
पूर्वा टाइम्स – ब्यूरो
सोनभद्र – सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NBRI), लखनऊ द्वारा जनपद सोनभद्र में निवास करने वाले गोंड, बैगा, पनिका, चेरो एवं खरवार जनजातीय समुदायों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान एवं प्रथाओं के आकलन, दस्तावेजीकरण, संवर्धन तथा संरक्षण के संबंध में शोध कार्य किया जा रहा है। यह शोध कार्य भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित परियोजना के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। परियोजना का नेतृत्व CSIR-NBRI के निदेशक डॉ. जहीर अहमद एवं मुख्य वैज्ञानिक डॉ. शरद श्रीवास्तव कर रहे हैं। इसी क्रम में आज जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से संस्थान के वैज्ञानिकों की बैठक हुई, जिसमें परियोजना के उद्देश्य एवं कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
परियोजना का प्रमुख उद्देश्य वन क्षेत्रों में निवास करने वाले जनजातीय समुदायों के लुप्तप्राय होते पारंपरिक ज्ञान का संकलन एवं दस्तावेजीकरण करना है। इसके अंतर्गत जनजातीय समुदायों द्वारा दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले औषधीय नुस्खों एवं पारंपरिक औषधीय योगों से संबंधित जानकारी एकत्रित की जाएगी। साथ ही, जनपद में उपलब्ध संकटग्रस्त एवं दुर्लभ जैव संसाधनों (RET—Rare, Endangered and Threatened) की पहचान कर उनके संरक्षण एवं संवर्धन तथा औषधीय पौधों की खेती को प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक में सोनभद्र के स्थानीय जैव संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए जनजातीय समुदायों की आजीविका एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने तथा भविष्य में अनुसंधान एवं विकास (R&D) की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
परियोजना के अंतर्गत CSIR-NBRI की टीम जनपद सोनभद्र के विभिन्न जनजाति बहुल क्षेत्रों का भ्रमण एवं सर्वेक्षण कर पारंपरिक ज्ञान का आकलन और दस्तावेजीकरण करेगी। इसके साथ ही स्थानीय औषधीय पौधों की पहचान, संरक्षण एवं उनकी खेती की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा, जिससे जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान को बढ़ावा मिल सके। परियोजना के प्रारंभिक चरण में क्षेत्रीय क्रियान्वयन का कार्य वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मंजूषा श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में किया जा रहा है। इस कार्य में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विक्रमा सिंह सहित अनिल द्विवेदी, अनुपमा देवी एवं दिव्यान्श राज सहयोग कर रहे हैं।

