प्रेस क्लब में सपा की प्रेस वार्ता के बीच पूर्व जिलाध्यक्ष को थप्पड़

लोकतंत्र बचाओ-वोट बचाओ की प्रेस वार्ता में मचा बवाल, कैमरों में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम

बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद, नगीना साहनी से अभद्रता के बाद मारा गया

असलहा लेकर प्रेस क्लब पहुंचने का मामला भी चर्चा में, पार्टी और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाह

पूर्वा टाइम्स

गोरखपुर। लोकतंत्र बचाओ सप्ताह एवं ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को लेकर गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में समाजवादी पार्टी की प्रेस वार्ता चल रही थी। प्रेस वार्ता के दौरान उस समय अचानक माहौल गरमा गया, जब बैठने की जगह को लेकर विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ मारपीट की घटना सामने आ गई। पत्रकारों के सामने हुई इस घटना ने प्रेस क्लब की मर्यादा और राजनीतिक कार्यक्रमों में अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरा घटनाक्रम प्रेस क्लब में लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ मौके पर मौजूद पत्रकारों के कैमरों में कैद है।
प्रेस वार्ता का आयोजन सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम की ओर से किया गया था। कार्यक्रम में सपा महानगर अध्यक्ष सबीर कुरैशी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश यादव, पूर्व विधायक विजय बहादुर यादव, काजल निषाद, संजय पहलवान, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री डॉ. मोहसिन, जय प्रकाश यादव, रणजीत पासवान समेत पार्टी के दर्जनों वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकार भी बड़ी संख्या में मौजूद थे और कैमरों से कार्यक्रम को कवर कर रहे थे।
इसी दौरान अंशुमान सिंह के पुत्र कमलेश प्रेस क्लब पहुंचे और काजल निषाद के बगल में बैठने का प्रयास किया। वहां जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से बातचीत शुरू हुई। बातचीत के दौरान विवाद बढ़ा और दोनों के बीच तीखी कहासुनी होने लगी। इसके बाद स्थिति इस कदर बिगड़ी कि नगीना साहनी के साथ हाथापाई हुई और उन्हें थप्पड़ मारा गया। घटना के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने और नगीना साहनी को नीचे आने के लिए कहे जाने का घटनाक्रम भी कैमरे में कैद हुआ है।
यह कोई ऐसी घटना नहीं है, जिसके बारे में केवल किसी व्यक्ति के बयान के आधार पर बात की जा रही हो। प्रेस क्लब में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और मौके पर मौजूद पत्रकारों के कैमरों में घटना का पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ है। ऐसे में घटना की वास्तविक स्थिति को वीडियो फुटेज के आधार पर आसानी से देखा और जांचा जा सकता है। यही वजह है कि घटना के बाद पत्रकारों में नाराजगी और बढ़ गई।
जिस समय सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम लोकतंत्र बचाने और वोट बचाने को लेकर मीडिया के सामने अपनी बात रख रहे थे, उसी समय प्रेस क्लब के भीतर पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष के साथ मारपीट की घटना ने पूरी प्रेस वार्ता का रुख बदल दिया। कार्यक्रम का राजनीतिक मुद्दा पीछे छूट गया और प्रेस क्लब में हुए थप्पड़ कांड की चर्चा शुरू हो गई।
घटना के बाद सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम ने इसे निंदनीय घटना बताया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को दी जाएगी और ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी। जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
घटना की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि मौके पर सपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। पार्टी के पदाधिकारियों और पत्रकारों के सामने पूर्व जिलाध्यक्ष के साथ इस तरह का व्यवहार होना संगठनात्मक अनुशासन पर भी सवाल खड़ा करता है। राजनीतिक कार्यक्रम में मतभेद या बैठने की जगह को लेकर विवाद हो सकता है, लेकिन विवाद का मारपीट में बदल जाना गंभीर विषय है।
घटना के बाद प्रेस क्लब में मौजूद पत्रकारों ने भी इसे गंभीरता से लिया। पत्रकारों का कहना है कि प्रेस क्लब पत्रकारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक संवाद का स्थान है। यहां राजनीतिक दलों की प्रेस वार्ताएं आयोजित होती हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति को इस संस्थान की गरिमा भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पत्रकारों के सामने मारपीट की घटना के बाद प्रेस क्लब की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
मामले में असलहा लेकर प्रेस वार्ता में पहुंचने की बात भी सामने आई है। प्रेस क्लब जैसे संस्थान में हथियार लेकर प्रवेश का सवाल बेहद गंभीर है। यदि कार्यक्रम में किसी व्यक्ति के पास असलहा था तो इसकी जांच आवश्यक है कि वह परिसर के भीतर कैसे पहुंचा। प्रेस क्लब की सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई या किसी व्यक्ति ने सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर प्रवेश किया, यह भी जांच का विषय होना चाहिए।
पत्रकारों के बीच यह मांग उठ रही है कि प्रेस क्लब में आयोजित होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। कोई भी व्यक्ति हथियार लेकर प्रेस क्लब में प्रवेश न कर सके और राजनीतिक रसूख या दबाव के नाम पर संस्थान की गरिमा के साथ खिलवाड़ न हो, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।
अब इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की कार्रवाई का इंतजार है। जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष को घटना की जानकारी देने की बात कही गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व कैमरे में रिकॉर्ड हुए इस घटनाक्रम को किस गंभीरता से लेता है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ संगठनात्मक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है।
दूसरी ओर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। क्या नगीना साहनी की ओर से थाने में तहरीर दी जाएगी? क्या सीसीटीवी फुटेज और पत्रकारों के कैमरों में कैद वीडियो को जांच का आधार बनाया जाएगा? क्या मारपीट की घटना में मुकदमा दर्ज होगा? और यदि असलहा लेकर प्रेस क्लब आने की पुष्टि होती है तो उस पर क्या कानूनी कार्रवाई होगी? इन सवालों का जवाब पुलिस की अगली कार्रवाई से मिलेगा।
बताया जाता है कि अंशुमान सिंह पूर्व में कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और बाद में शिवपाल सिंह यादव द्वारा गठित प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से भी जुड़े थे। हालांकि वर्तमान राजनीतिक स्थिति और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पक्षों और पुलिस जांच से होगी। फिलहाल घटना का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पूरा घटनाक्रम प्रेस क्लब के सीसीटीवी और पत्रकारों के कैमरों में रिकॉर्ड हुआ है।
प्रेस क्लब में हुई इस घटना ने सपा की प्रेस वार्ता को राजनीतिक कार्यक्रम से ज्यादा विवाद का केंद्र बना दिया है। लोकतंत्र बचाने और वोट बचाने का संदेश देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में ही पत्रकारों के सामने वरिष्ठ पार्टी नेता के साथ मारपीट होना निश्चित रूप से गंभीर घटनाक्रम है। अब कैमरे में कैद इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबकी निगाहें पार्टी और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं।
प्रेस क्लब की मर्यादा, पत्रकारों की सुरक्षा और सार्वजनिक संस्थान में अनुशासन—इन तीनों सवालों का जवाब अब कार्रवाई से ही मिलेगा। कैमरे में रिकॉर्ड घटना के बाद यह देखना अहम होगा कि जिम्मेदार व्यक्ति पर संगठनात्मक और कानूनी स्तर पर क्या कदम उठाया जाता है।

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