21 जून 2026: उत्तरी गोलार्ध ( भारत सहित कई देशों) में होगा वर्ष का सबसे लंबा दिन।

गोरखपुर। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 21 जून 2026 की दोपहर लगभग 1 बजकर 54 मिनट (भारतीय मानक समय) पर पृथ्वी और सूर्य की ज्यामिति एक ऐसी स्थिति में पहुंचेगी, जिसे खगोल विज्ञान में ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) कहा जाता है। यह वर्ष 2026 में उत्तरी गोलार्ध का सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय क्षणों में से एक होगा। इसी दिन भारत सहित उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश देशों में वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात्रि दर्ज की जाएगी।

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार यह घटना किसी विशेष खगोलीय संयोग या ग्रहों की स्थिति के कारण नहीं, बल्कि पृथ्वी की धुरी के लगभग 23.5 डिग्री के झुकाव का प्रत्यक्ष परिणाम है। यही झुकाव पृथ्वी पर ऋतुओं के निर्माण का मूल कारण है।

क्या होता है ग्रीष्म संक्रांति के समय?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रीष्म संक्रांति वह क्षण है जब सूर्य,पृथ्वी के भूमध्य रेखीय तल के सापेक्ष अपनी अधिकतम उत्तरी स्थिति पर पहुंच जाता है। इस समय सूर्य की सीधी किरणें लगभग कर्क रेखा (23.44° उत्तर अक्षांश) पर पड़ती हैं। या कुछ यूं कहें कि खगोल वैज्ञानिक दृष्टि से यह वह क्षण होता है जब सूर्य की उत्तर दिशा की प्रत्यक्ष वार्षिक यात्रा समाप्त होकर पुनः दक्षिण की ओर बढ़ना आरम्भ करती है। यही कारण है कि 21 जून के बाद उत्तरी गोलार्ध में दिन धीरे-धीरे छोटे होने लगते हैं, हालांकि गर्मी का मौसम कई सप्ताह तक जारी रहता है।

पृथ्वी का झुकाव ही असली कारण क्यों है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बहुत से लोग मानते हैं कि गर्मियों में पृथ्वी, सूर्य के अधिक निकट आ जाती है, इसलिए तापमान बढ़ता है। लेकिन यह धारणा वैज्ञानिक रूप से गलत है। वास्तव में पृथ्वी जुलाई के आरम्भ में सूर्य से अपनी वार्षिक अधिकतम दूरी (Aphelion) के निकट होती है। फिर भी उत्तरी गोलार्ध में गर्मी रहती है। इसका कारण केवल पृथ्वी की धुरी का झुकाव है। क्योंकि 21 जून के आसपास उत्तरी ध्रुव, सूर्य की ओर सर्वाधिक झुका रहता है। परिणामस्वरूप सूर्य की किरणें अधिक सीधी पड़ती हैं। एवं दिन भर अधिक समय तक सूर्य दिखाई देता है। साथ ही प्रति इकाई क्षेत्र अधिक सौर ऊर्जा प्राप्त होती है। और दिन की अवधि वर्ष में सबसे अधिक हो जाती है।

भारत में कितना लंबा होगा दिन ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत लगभग 8° उत्तर से 37° उत्तर अक्षांश तक फैला हुआ है, इसलिए ग्रीष्म संक्रांति का प्रभाव देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग दिखाई देता है। दक्षिण भारत में दिन और रात के समय में अपेक्षाकृत कम अंतर होता है, जबकि उत्तर भारत में यह अंतर काफी बढ़ जाता है। प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ , गोरखपुर और भोपाल जैसे क्षेत्रों में दिन लगभग 13 घंटे 40 मिनट के आसपास रहेगा। दिल्ली और उससे उत्तर के क्षेत्रों में दिन लगभग 14 घंटे तक पहुंच सकता है। जितना अधिक उत्तर की ओर जाएंगे, दिन उतना ही लंबा होता जाएगा।

क्या यह वर्ष का सबसे गर्म दिन भी होगा ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऐसा नहीं होता है कि यही दिन वर्ष का सबसे गर्म दिन होता है यद्यपि 21 जून को सूर्य का प्रकाश सबसे अधिक समय तक प्राप्त होता है, लेकिन यह आवश्यक नहीं कि यही वर्ष का सबसे गर्म दिन हो। पृथ्वी की सतह, महासागर और वायुमंडल सूर्य से प्राप्त अतिरिक्त ऊर्जा को धीरे-धीरे संग्रहित करते हैं। इस कारण तापमान अपने अधिकतम स्तर पर पहुंचने में कई सप्ताह लगते हैं। यही वजह है कि भारत सहित दुनिया के अधिकांश क्षेत्रों में सबसे अधिक गर्मी जून के अंत, जुलाई अथवा अगस्त में महसूस होती है।इस वैज्ञानिक प्रभाव को मौसमी विलंब (Seasonal Lag) कहा जाता है।

खगोल विज्ञान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दिन?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रीष्म संक्रांति केवल एक कैलेंडर घटना नहीं, बल्कि पृथ्वी की गतियों को समझने की एक प्राकृतिक प्रयोगशाला है। पृथ्वी की धुरी के झुकाव का अध्ययन करने,ऋतु परिवर्तन को समझने,सौर ऊर्जा वितरण का विश्लेषण करने,जलवायु एवं मौसम विज्ञान संबंधी मॉडल विकसित करने,तथा सूर्य-पृथ्वी ज्यामिति की सटीक गणनाएं करने में सहायता प्रदान करती है।इसी कारण संक्रांति का समय आधुनिक खगोल विज्ञान में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से भी है संबंध है क्या?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित (International Day of Yoga) अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। इस तिथि का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होता है और अनेक सभ्यताओं में प्रकाश, ऊर्जा और संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

आईए अब, जून संक्रांति या ग्रीष्म संक्रांति/ग्रीष्म अयनांत 2026 को विस्तारपूर्वक समझते हैं

जून संक्रांति /ग्रीष्म संक्रांति(June Solstice/Summer Solstice) 2026

क्या होता है जून संक्रांति/ग्रीष्म संक्रांति ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जून संक्रांति 2026 आ रही है!
इस दौरान सूर्य आकाश में अपने सबसे ऊँचे बिंदु पर पहुँचता है, जिससे उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन और दक्षिणी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन होता है।
यह वह समय होता है जब सूर्य की आकाश में दिखाई देने वाली उत्तर दिशा की यात्रा मानो ठहर सी जाती है, और इसके बाद सूर्य धीरे-धीरे आकाश में दक्षिण दिशा की ओर खिसकता हुआ दिखाई देने लगता है।
( खगोल वैज्ञानिक रूप से इसे ग्रीष्म संक्रांति या Summer Solstice कहा जाता है।)

भारत में कब और कितने बजे घटित होगी जून संक्रांति (June Solstice) 2026 ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन जिसे ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) कहा जाता है, और दक्षिणी गोलार्ध में वर्ष का सबसे छोटा दिन जिसे शीत संक्रांति (Winter Solstice) कहा जाता है, यह खगोलीय घटना 21 जून 2026 को घटित होगी।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी के घूर्णन अक्ष के झुकाव (लगभग 23.5°) के कारण इस समय उत्तरी ध्रुव, सूर्य की ओर झुका हुआ होता है। इसी कारण उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणें अधिक समय तक प्राप्त होती हैं और दिन की अवधि सबसे अधिक होती है।
आर्कटिक क्षेत्र (उत्तरी ध्रुव के आसपास के क्षेत्र) में रहने वाले लोगों के लिए इस समय सूर्यास्त नहीं होता, जिसे मध्यरात्रि सूर्य (Midnight Sun) की घटना भी कहा जाता है। और जून संक्रांति का सटीक क्षण बह क्षण होता है जब सूर्य अपनी सबसे अधिक उत्तरी स्थिति (अधिकतम क्रांतिवृत्तीय झुकाव / Highest Declination) पर पहुँचता है और यह भारतीय समयानुसार 21 जून 2026, दोपहर लगभग 01:54 बजे (भारतीय मानक समय IST) पर घटित होगा। इस क्षण के बाद सूर्य का आकाश में दिखाई देने वाला मार्ग धीरे-धीरे दक्षिण दिशा की ओर खिसकना शुरू हो जाता है।

क्यों होता है 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म, दक्षिणी गोलार्ध में शीत ऋतु ?।

उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म, दक्षिणी गोलार्ध में शीत ऋतु के बारे में जानकारी देते हुए खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि संक्रांति (Solstice) खगोलीय दृष्टि से एक महत्वपूर्ण दिन है, जब पृथ्वी के दोनों गोलार्धों में से एक गोलार्ध में दिन की अवधि वर्ष की सबसे लंबी होती है और दूसरे गोलार्ध में सबसे छोटी। यह घटना प्रत्येक वर्ष लगभग 21 जून और 21 दिसंबर के आसपास होती है ,जिन्हें क्रमशः जून संक्रांति (June Solstice) और दिसंबर संक्रांति (December Solstice) कहा जाता है।

खगोलीय रूप से संक्रांति क्या है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय दृष्टि से संक्रांति वह क्षण है जब सूर्य आकाशीय भूमध्य रेखा (Celestial Equator) से अपनी अधिकतम कोणीय दूरी (Maximum Declination) पर पहुँचता है। 21 जून को सूर्य का झुकाव (Solar Declination):
+23°26′ होता है।

संक्रांति शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि Solstice शब्द लैटिन भाषा के दो शब्दों से बना है:
पहला है Sol = सूर्य
और दूसरा है
Sistere = स्थिर खड़ा होना

अर्थात Solstice का अर्थ हुआ कि सूर्य का ठहर जा जाना।
यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि संक्रांति के समय सूर्य की उत्तर-दक्षिण दिशा में दिखाई देने वाली गति कुछ समय के लिए रुकती हुई सी प्रतीत होती है। जून संक्रांति का सटीक क्षण (Exact Moment) या जब सूर्य अपनी अधिकतम उत्तरी स्थिति (Highest Declination) पर पहुँचता है जोकि 21 जून 2026, दोपहर लगभग 01:54 बजे (IST भारतीय मानक समय) पर होगा यह क्षण पृथ्वी की कक्षा और अक्षीय झुकाव के कारण बनने वाली एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है।

जून संक्रांति /ग्रीष्म संक्रांति(Summer Solstice) क्यों इतनी महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में होती है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जून महीने की संक्रांति को उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) कहा जाता है, क्योंकि इस दिन उत्तरी गोलार्ध में दिन की अवधि वर्ष की सबसे अधिक होती है और यह गर्मी के मौसम का चरम समय माना जाता है। वहीं दक्षिणी गोलार्ध में यही दिन शीत संक्रांति (Winter Solstice) कहलाता है, क्योंकि वहाँ इस दिन दिन की अवधि सबसे कम होती है और यह सर्दी के मौसम का चरम समय होता है।

पृथ्वी के अक्ष का झुकाव और सूर्य की स्थिति क्या होती है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी के घूर्णन अक्ष (Earth’s Axis) के लगभग 23.5° झुके होने के कारण जून संक्रांति के समय उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर झुका हुआ होता है। इस कारण से उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणें अधिक समय तक प्राप्त होती हैं एवं दिन सबसे लंबा होता है साथ ही रात सबसे छोटी होती है। और आर्कटिक क्षेत्र (Arctic Region) में रहने वाले लोगों के लिए इस दिन सूर्य अस्त नहीं होता। इसे मध्यरात्रि सूर्य (Midnight Sun) की घटना कहा जाता है।

क्या था जून संक्रांति पर एरैटोस्थनीज का प्रसिद्ध प्रयोग (Eratosthenes Experiment)?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्रसिद्ध यूनानी वैज्ञानिक एरैटोस्थनीज (Eratosthenes) ने पृथ्वी की परिधि मापने का प्रसिद्ध प्रयोग जून संक्रांति के दिन किया था।उन्होंने यह माना (हालाँकि यह मान्यता गलत थी) कि साइनी (Syene) कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के पास स्थित है। उस दिन सूर्य साइनी में ठीक सिर के ऊपर (Zenith) दिखाई देता था और उन्होंने अलेक्जेंड्रिया (Alexandria) में एक ऊर्ध्वाधर छड़ी (Vertical Stick) की छाया को मापकर पृथ्वी की परिधि का अनुमान लगाया था।

क्या होती है सूर्य की उत्तर-दक्षिण गति ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूरे वर्ष सूर्य,आकाश में उत्तर और दक्षिण दिशा के बीच आगे-पीछे खिसकता / बदलता हुआ दिखाई देता है। और सूर्य की उत्तर दिशा की ओर दिखाई देने वाली यात्रा को उत्तरायण (Uttarayana) कहा जाता है एवं सूर्य की दक्षिण दिशा की ओर दिखाई देने वाली यात्रा को दक्षिणायन (Dakshinayana) कहा जाता है। इसीलिए जून संक्रांति उत्तरायण की समाप्ति और दक्षिणायन की शुरुआत का संकेत देती है।इसलिए इसे दक्षिणायनम् (Dakshinayanam) या कर्कटक संक्रांति (Karkataka Sankramana) भी कहा जाता है।

पृथ्वी का परिक्रमण क्या होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.5° पर झुकी हुई सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार या अंडाकार पथ पर घूमती है। यही ऋतुओं के बदलने का कारण है। पृथ्वी के परिक्रमा के दौरान, पृथ्वी को चार महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त होते हैं। जो इस प्रकार होते हैं।
अयनांत : यह दो अयनांत दिनों में होते हैं। जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है, उसे ग्रीष्म अयनांत कहते है, और जब यह सूर्य के दूसरी ओर झुका होता है, तो इसे शरद अयनांत कहते हैं। ग्रीष्म अयनांत के दौरान दिन बड़े होते हैं, जबकि शरद अयनांत के दौरान दिन छोटे होते हैं।

विषुवत : यह साल में दो बार होता है, जब सूर्य की ओर झुकाव नहीं हो। सूर्य उर्ध्वस्थ हो, पूरे विश्व में दिन एवं रात की अवधि लगभग सामान होती है (प्रत्येक लगभग 12 घंटे) क्योंकि प्रकाशस्रोत का वृत्त अक्षांश का द्विविभाजक होता है।

पृथ्वी पर (ऋतुएँ) कैसे होती है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऋतुएँ, पृथ्वी द्वारा अपने अक्ष पर झुकी हुई होने के कारण सूर्य के घूर्णन काल के दौरान बदलती हैं और ऋतुएँ ही वर्ष की विभाजित हिस्सा होती हैं जो मौसम, प्राकृतिक वातावरण (पारिस्थितिकी) और दिन रात के घंटों में परिवर्तन द्वारा दर्शित होती हैं। ऋतुएँ पृथ्वी की सूर्य की वार्षिक परिक्रमा और अपने अक्ष तल पर सापेक्षिक झुकाव के परिणाम स्वरूप होती हैं। शीतोष्ण कटिबन्धीय और ध्रुवीय क्षेत्रों में ऋतुएँ सूर्य की किरणों की सघनता जो धरातल पर पहुँचती हैं उसके द्वारा स्पष्टतः अंकित होती हैं।

जून संक्रांति के दिन सूर्य की विशेष स्थिति क्या होती है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दिन सूर्य पूरे वर्ष में आकाश में अपने सबसे उत्तरी बिंदु (Northernmost Point) पर पहुँचता हुआ दिखाई देता है। एवं पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के कारण- उत्तरी ध्रुव को लगभग 24 घंटे सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है। साथ ही दक्षिणी ध्रुव को सूर्य का प्रकाश प्राप्त नहीं होता।

सूर्य का कर्क रेखा पर लंबवत होना क्या होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जून संक्रांति के दिन सूर्य की किरणें कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर दोपहर के समय लगभग लंबवत (Zenith) पड़ती हैं। इसे ही सूर्य का कर्क रेखा पर लंबवत होना कहा जाता है।

दिन और रात (Day and Night) कैसे होते हैं?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी के अक्ष पर घूर्णन (जो 24 घंटे में होता है) के कारण पृथ्वी के सतह के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न समय पर सूर्य का उदय होता है। पृथ्वी का वह भाग जो सूर्य के सामने होता है, वहाँ दिन होता है तथा इसके विपरीत पृथ्वी का वह भाग जो सूर्य के सामने नहीं होता है, वहाँ रात होती है। या कुछ यूं कहें कि पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन या प्रतिदिन की अक्षीय चाल के कारण ही दिन और रात होते हैं।

पंचांग/कैलेंडर (Calendar) में खगोल का झोल क्या होता है ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रेगोरियन कैलेंडर जो अभी उपयोग में है, इसे 16वीं शताब्दी में तैयार किया गया था। साल के समय का उपखंड, सप्ताह तथा दिन, पृथ्वी तथा चन्द्रमा के खगोलीय गति पर आधारित होता है। पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमने में/एक पूरे चक्कर में लगभग 24 घंटे लेती है। चंद्रमा,पृथ्वी का चक्कर लगाने में 29 दिन (एक चन्द्र महीना) में लगाता है। पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर अनुमानित 365¼ दिन(एक वर्ष) में एक पूरा परिक्रमा लगाती है। इन सभी चीज़ों को मिलाकर देखा जाए तो काफी मुश्किल है एक बिल्कुल सही कैलेंडर को तैयार करना जो बहुत से अलग-अलग बातों पर आधारित हो और तब हमारे कैलेण्डर में सिर्फ 365 दिन होते हों। लेकिन इसको सही करने के लिए इसीलिए चार वर्षों में एक बार हम एक अलग दिन जोड़कर इसकी कमी की पूर्ति करते हैं जिसे लीप इयर /अधिवर्ष कहते हैं।

पृथ्वी का अक्ष और कक्ष क्या होता है?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी के सहित सभी ग्रह दीर्घवृताकार कक्ष पर सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। शुक्र तथा यूरेनस के अलावा, अन्य सभी ग्रह अपने पथ पर पश्चिम से पूर्व की ओर घड़ी की विपरीत दिशा में घूमते हैं जबकि शुक्र तथा यूरेनस पूर्व से पश्चिम की ओर घूमते हैं। पृथ्वी की मुख्यतः दो गतियाँ होती हैं-घूर्णन तथा परिक्रमण। घूर्णन में पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है, जिसे 23 घंटे, 56 मिनट तथा 4.091 सेकंड (साइडेरियल डे) में पूरा करती है। इससे दिन और रात बनते हैं। दूसरी गति परिक्रमण से ऋतुएं बनती हैं। पृथ्वी 30 कि. मी. प्रति सेकंड की चाल से सूर्य का चक्कर लगाती है जिसे 365.25 दिनों में पूरा करती है। इस समयावधि से एक कैलेंडर वर्ष बनता है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जून संक्रांति (June Solstice) जिसे जून संक्रांति, ग्रीष्म संक्रांति एवं समर सॉलिस्टिस या ग्रीष्म अयनांत आदि नामों से भी जाना जाता है, अगर इसको संक्षिप्त खगोलीय रूप में कहा जाए तो हम कह सकते हैं कि यह वह खगोलीय क्षण होता है जब सूर्य आकाश में अपनी सबसे उत्तरी स्थिति पर पहुँचता है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। साथ ही दक्षिणी गोलार्ध में इसी दिन शीत संक्रांति होती है।। और भारत में इस दिन लगभग 14 घंटे तक का दिन हो सकता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि समर सोल्स्टिस (Summer Solstice), जिसे हिंदी में ग्रीष्म संक्रांति भी कहा जाता है, साल का वह दिन होता है जब पृथ्वी के किसी एक गोलार्ध का सूर्य की ओर सबसे अधिकतम झुकाव होता है। उत्तरी गोलार्ध में यह खगोलीय घटना आमतौर पर 20 से 21 जून के बीच होती है लेकिन इस बार यह बर्ष 2026 में 21 जून को घटित होगी, समर सोल्स्टिस (उत्तरी गोलार्ध में जून) में साल का सबसे लंबा दिन होता है इस दिन सूर्य आकाश में अपने सबसे उत्तरी बिंदु पर होता है, जिसके परिणामस्वरूप सबसे अधिक देर तक धूप रहती है,खगोलीय शुरुआत की बात करें तो पाते हैं कि खगोलीय रूप से समर सोल्स्टिस को ही गर्मियों की शुरुआत (Astronomical Summer) माना जाता है और इस दिन सूर्य की स्थिति की बात करें तो पाते हैं कि इस दिन सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा से 23.5 डिग्री उत्तर में स्थित कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर बिल्कुल सीधी / लंबवत पड़ती है, भारत भी इसी क्षेत्र में आता है इसीलिए भारत जैसे उत्तरी क्षेत्रों में इस दिन धूप लगभग 14 घंटे तक रहती सकती है।

क्या है इसका सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्राचीन काल से ही दुनिया भर की संस्कृतियां इस दिन को फसल चक्र, मौसम परिवर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़कर मनाती आ रही हैं। ब्रिटेन का प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक ‘स्टोनहेंज’ (Stonehenge) समर सोल्स्टिस के सूर्योदय से बिल्कुल सीधा जुड़ा हुआ है, जहाँ हर साल हजारों लोग इकट्ठा होकर उत्सव मनाते हैं,
स्टोनहेंज (इंग्लैंड) के अलावा, यह खगोलीय घटना दुनिया के कई अन्य प्रसिद्ध स्थलों और त्योहारों से जुड़ी हुई है साथ ही अन्य प्राचीन संरचनाएँ और संरेखण माचू पिचू (पेरू),इंका साम्राज्य के इस ऐतिहासिक स्थल पर एक विशेष खगोलीय वेधशाला (टोरियन) है। समर सॉलिस्टिस के दौरान, सूर्य की किरणें सीधे इस खिड़की से अंदर आती हैं। एवं चिचेन इत्ज़ा (मेक्सिको) ,इस प्रसिद्ध माया मंदिर (कुकुलकन पिरामिड) को सूर्य की गति के अनुसार डिज़ाइन किया गया था जिस से यहाँ भी समर सॉलिस्टिस के दिन सूर्य की रोशनी का विशेष संरेखण (alignment) देखने को मिलता है और हागर किम (माल्टा), इस प्राचीन मंदिर में सूर्य की किरणें एक विशेष छेद से गुजरकर प्रकाश का एक अर्धचंद्राकार आकार बनाती हैं। अब अगर सांस्कृतिक उत्सव और परंपराएँ देखें तो पाते हैं कि मिडसमर (स्वीडन और नॉर्डिक देश),उत्तरी यूरोप में इस दिन को ‘मिडसमर’ के रूप में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं, नाचते-गाते हैं और दावतें करते हैं, और देखें तो पाते हैं कि इंति रायमी (पेरू) ,मूल रूप से इंका सभ्यता द्वारा सूर्य देवता (Inti) के सम्मान में मनाया जाने वाला यह एक प्रमुख उत्सव होता है। एवं ला फेटे डे ला म्यूसिक (फ्रांस),फ्रांस में ग्रीष्म संक्रांति के उपलक्ष्य में यह प्रसिद्ध संगीत उत्सव मनाया जाता है, इस प्रकार हम समझ सकते हैं कि 21 जून 2026 की ग्रीष्म संक्रांति पृथ्वी की 23.5 डिग्री झुकी हुई धुरी और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा का शानदार परिणाम है, इसमें 21 जून 2026 की दोपहर लगभग 1:54 बजे भारत भी इस महत्वपूर्ण खगोलीय क्षण का साक्षी बनेगा। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी की साधारण-सी दिखने वाली गति ही ऋतुओं, दिन-रात की अवधि और हमारे पूरे जलवायु तंत्र को नियंत्रित करती है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि विज्ञान की दृष्टि से ग्रीष्म संक्रांति केवल वर्ष का सबसे लंबा दिन नहीं, बल्कि पृथ्वी और सूर्य के बीच चल रहे उस अद्भुत खगोलीय नृत्य का प्रमाण है, जो अरबों वर्षों से हमारे ग्रह पर जीवन की परिस्थितियों को आकार देता आ रहा है।

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