पंचायत चुनाव 2026 जल्द कराने की मांग

प्रशासक बनाकर चुनाव टालना लोकतंत्र की हत्या संघर्ष समिति ने जाताया विरोध।
पूर्वा टाइम्स -बेचन शर्मा
सहजनवा गोरखपुर। पंचायत चुनाव संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव-2026 को जल्द कराने की मांग को लेकर महामहिम राज्यपाल के नाम नायब तहसीलदार रामसूरत को ज्ञापन सौंपा है। समिति ने आरोप लगाया है कि यूपी सरकार चुनाव को 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराने की तैयारी में है, जो सीधे-सीधे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
दिनांक 1/6/2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र में समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने और पंचायत चुनाव में हार के डर से चुनाव को जानबूझकर लंबित कर रही है। पत्र में लिखा गया है कि प्रधानों को प्रशासक बनाकर पंचायत चुनाव आगे बढ़ाना लोकतंत्र की हत्या के समान है। इससे संभावित प्रत्याशियों का खर्च भी अनावश्यक रूप से बढ़ेगा।
संघर्ष समिति ने पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और मतदाता सूची प्रकाशन में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए। पत्र के अनुसार, अक्टूबर 2025 में रिक्त पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना 8 महीने विलंब से 20 मई 2026 को जारी की गई। इसी तरह मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन जो 15 जनवरी 2026 को होना था, उसे टालते हुए अब 10 जून 2026 की तारीख दी गई है। समिति का मानना है कि ये सभी परिस्थितियां सरकार की नीयत में खोट दर्शाती हैं।
ज्ञापन देने वालों ने कहा कि यूपी सरकार पंचायत चुनावों में अपने खराब प्रदर्शन के भय से ही चुनाव टालना चाहती है, ताकि इसका असर 2027 विधानसभा चुनाव पर न पड़े। अंत में समिति ने जनहित और भावी प्रत्याशियों की भावनाओं को देखते हुए राज्यपाल से अनुरोध किया है कि यूपी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जल्द से जल्द कराने की व्यवस्था करें।
ज्ञापन पर पंचायत चुनाव संघर्ष समिति के दिलीप कुमार मौर्य, इंद्रदेव सिंह आदि पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव में और देरी की गई तो वह प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी। दिलीप कुमार मौर्य गब्बू लाल प्रजापति इंद्रदेव सिंह हरेंद्र यादव ताज मोहम्मद उर्फ मजनू भाई राजनाथ राव सत्येंद्र मौर्य उपस्थित रहें।








