एमएमएमयूटी में एमटेक छात्रों की फीस विसंगति पर बवाल, जिलाधिकारी से मिले छात्र, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन — न्याय की गुहार

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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) गोरखपुर के एमटेक छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लागू की गई फीस विसंगति के विरोध में कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी कृष्ण करुणेश (आईएएस) से मुलाकात की। फीस में भारी अंतर से आहत छात्रों ने जिलाधिकारी को अपनी व्यथा सुनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा और न्याय की गुहार लगाई।

क्या है मामला?

एमटेक (परास्नातक) पाठ्यक्रम में पिछले शैक्षणिक सत्र (2023–25) में प्रथम वर्ष के छात्रों से वार्षिक फीस ₹1,22,000 वसूली गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस वर्ष नए शैक्षणिक सत्र 2025–27 के लिए उसी कोर्स की फीस घटाकर मात्र ₹42,000 कर दी है। लेकिन विसंगति यह है कि वर्तमान में द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत छात्रों को इस राहत का लाभ नहीं दिया जा रहा — उनसे पुरानी अधिकतम फीस ₹1,22,000 ही वसूली जा रही है।

छात्रों का कहना है कि यह न केवल अव्यावहारिक है बल्कि खुला अन्याय भी है। “जब नए छात्रों को कम फीस में दाखिला दिया जा रहा है तो पुराने छात्रों से मनमानी तरीके से ज्यादा फीस क्यों वसूली जा रही है?” — यह सवाल छात्रों ने जिलाधिकारी के समक्ष उठाया।

मध्यमवर्गीय परिवारों पर दोहरी मार

कई छात्रों ने कहा कि अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण या निम्न-मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से आते हैं। कोरोना काल और आर्थिक मंदी के बाद से कई परिवार पहले से ही कर्ज और बेरोजगारी की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में अचानक करीब दोगुनी फीस चुकाना संभव नहीं है।

छात्रों ने यह भी कहा कि कई परिवारों ने अपनी जमीन गिरवी रखकर या कर्ज लेकर बच्चों को तकनीकी शिक्षा दिलाने का सपना पूरा किया है। अब सत्र के बीच में ही फीस विसंगति से उनके सपनों पर पानी फिरता दिख रहा है।

पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

ज्ञापन में छात्रों ने कहा कि फीस में इस तरह की मनमानी वृद्धि या परिवर्तन पूर्व सूचना के बिना करना विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। छात्रों का तर्क है कि प्रवेश के समय जो फीस संरचना घोषित की गई थी, उसी के अनुसार आगे की फीस ली जानी चाहिए थी। लेकिन विश्वविद्यालय ने नए छात्रों के लिए कम फीस लागू कर दी और पहले से नामांकित छात्रों पर पुरानी अधिक फीस का बोझ डाल दिया।

छात्रों की तीन प्रमुख मांगें

1️⃣ द्वितीय वर्ष एमटेक छात्रों की वार्षिक फीस तत्काल प्रभाव से घटाकर ₹42,000 की जाए।
2️⃣ सत्र 2023–25 एवं 2024–26 के छात्रों को भी नए प्रवेश सत्र 2025–27 की शुल्क संरचना के अनुसार राहत दी जाए।
3️⃣ भविष्य में शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और छात्र प्रतिनिधियों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

कई छात्र संगठनों का मिला समर्थन

जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन पर शिवम कुमार त्रिपाठी, उत्कर्ष सिंह, सुधांशु त्रिपाठी, राज सिंह, सौम्या सिंह, निशिता श्रीवास्तव, सुरजकुमार खन्ना, अमन कुमार, हिमांशु सिंह, आदित्य नाथ यादव, आदित्य सिंह, अशुतोष त्रिपाठी, सतेन्द्र कुमार, शादमान और शोभित खान समेत करीब 150 छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं। छात्रों को विश्वविद्यालय के कुछ पूर्ववर्ती छात्र संघ पदाधिकारियों और युवा संगठनों का भी नैतिक समर्थन मिल रहा है।

जिलाधिकारी का आश्वासन

जिलाधिकारी कृष्ण करुणेश ने छात्रों की बात गंभीरता से सुनी और उन्हें आश्वासन दिया कि यह ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय तक तत्काल भेजा जाएगा। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद कर छात्रों की समस्या का यथासंभव त्वरित समाधान कराने का भरोसा दिलाया।

विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी

छात्रों के आंदोलन और ज्ञापन के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान अब तक नहीं आया है। हालांकि विश्वविद्यालय सूत्रों का दावा है कि कुलपति के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है जो फीस संरचना की विसंगतियों की समीक्षा कर रही है। समिति की रिपोर्ट अगले सप्ताह आने की संभावना जताई जा रही है।

छात्रों ने चेताया: आंदोलन होगा तेज

छात्रों ने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे विवश होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की छवि और छात्रों का भविष्य दोनों दांव पर हैं — ऐसे में वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

क्या कहते हैं छात्र

द्वितीय वर्ष एमटेक छात्र सिद्धार्थ शंकर पांडेय ने कहा —
“शिक्षा का अधिकार आर्थिक स्थिति से नहीं बंधा होना चाहिए। यह विसंगति हमारे जैसे मध्यमवर्गीय छात्रों के लिए दोहरी मार है। अगर नए छात्रों को कम फीस में दाखिला दिया जा सकता है तो हमें क्यों नहीं?”

छात्र हिमांशु तिवारी ने कहा —
“हम विश्वविद्यालय के भरोसे पर दाखिला लेते हैं, अगर बीच सत्र में फीस का ढांचा बदल जाएगा तो हमारे परिवारों पर क्या बीतेगी, यह कोई नहीं समझता।”

अब सबकी नजर सरकार पर

अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय छात्रों की इस गुहार पर क्या कदम उठाता है। फिलहाल छात्रों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस मामले को गंभीरता से लेंगे ताकि कोई भी विद्यार्थी आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा से वंचित न रहे और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा सुलभ बनी रहे।

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