रेणुकूट में पहली ही बरसात ने खोली विकास के दावों की पोल पूर्व नपं अध्यक्ष ने किया वार्डों का दौरा, वर्तमान नेतृत्व पर तीखा हमला

पहली ही बरसात में बहे विकास के करोड़ों, पूर्व नपं अध्यक्ष ने वार्डों में उतरकर वर्तमान बोर्ड को घेरा

दिखावे और शिलान्यास में बहे सरकारी करोड़, धरातल पर चलने लायक सड़कें भी नहीं

पूर्वा टाइम्स – समाचार

सोनभद्र -रेणुकूट, मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने रेणुकूट नगर पंचायत के विकास के दावों, वादों और कागजी आकड़ों की पूरी तरह कलई खोलकर रख दी है। जलजमाव, जर्जर हो चुकी सड़कों और मूलभूत सुविधाओं के घोर अभाव से त्रस्त जनता की सुध लेने के लिए पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि बबलू सिंह (टीम निशा बबलू सिंह) रविवार को लाव-लश्कर के साथ सीधे जमीन पर उतरे। उन्होंने नगर के सबसे प्रभावित वार्ड संख्या 3 और 5 का सघन दौरा कर स्थानीय देवतुल्य जनता का कुशलक्षेम जाना और उनकी पीड़ा को बेहद करीब से सुना। इस दौरान वर्तमान नगर पंचायत प्रशासन की अनदेखी से नाराज नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अपनी आपबीती बयां की। वार्डों की बदहाली का आंखों देखा हाल बयां करते हुए पूर्व अध्यक्ष बबलू निशा सिंह ने वर्तमान बोर्ड और प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत द्वारा विगत 4 वर्षों में किए गए तथाकथित विकास कार्यों की जमीनी हकीकत अत्यंत भयावह और चिंताजनक है। सड़कों पर केवल दिखावे के नाम पर और कागजों का पेट भरने के लिए करोड़ों रुपये के बजट ठिकाने लगा दिए गए, लेकिन हकीकत यह है कि आज आम नागरिकों को चलने योग्य सुरक्षित सड़कें तक मयस्सर नहीं हैं। हैरानी की बात यह है कि मात्र 6 महीने के भीतर आनन-फानन में कराए गए निर्माण कार्यों की इस पहली ही बारिश में धज्जियाँ उड़ चुकी हैं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री के खेल को उजागर करता है। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य और स्वच्छता के मोर्चे पर नगर पंचायत पूरी तरह फेल नजर आई।वार्डवासियों ने बताया कि क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। पानी की टंकियों की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि वे कभी भी बड़े हादसे को आमंत्रण दे सकती हैं, कई बिजली व सप्लाई के खंभे गिरने की कगार पर हैं। यही नहीं, मानसून से पहले की जाने वाली नाला-सफाई की कागजी खानापूर्ति के कारण नालियों का बदबूदार, दूषित पानी सीधे लोगों के घरों, आंगनों और रसोई तक में प्रवेश कर गया है। सार्वजनिक शौचालय रख-रखाव के अभाव में कबाड़ बन चुके हैं और उपयोग के लायक नहीं बचे हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। नगर की मार्ग प्रकाश व्यवस्था (स्ट्रीट लाइट्स) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया। स्थानीय निवासियों ने पूर्व अध्यक्ष को अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि पूर्ववर्ती बोर्ड के कार्यकाल में जो स्ट्रीट लाइटें और खंभे चमचमा रहे थे, वर्तमान प्रशासन ने उनके अधिकांश बल्बों को पिछले 1 वर्ष से यह कहकर निकाल लिया कि इनकी मरम्मत कराई जाएगी। आज पूरा साल बीत जाने के बाद भी न तो वे बल्ब वापस आए और न ही नई लाइटों की कोई व्यवस्था की गई। नतीजा यह है कि सूरज ढलते ही पूरा वार्ड घने अंधेरे के आगोश में समा जाता है, जिससे राहगीरों और महिलाओं की सुरक्षा दांव पर लगी है। जनता की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता को देखकर पूर्व अध्यक्ष का पारा चढ़ गया। उन्होंने वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष ममता सिंह और उनके सिपहसालारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा रेणुकूट की इन नारकीय परिस्थितियों को देखते हुए अब इसे नगर पंचायत कहें या नर्क पंचायत जब जनता बूंद-बूंद पानी, साफ सड़क और रोशनी के लिए त्रस्त है, तब नगर अध्यक्ष ममता सिंह मूकदर्शक बने हुए हैं। नगर में पिछले 4 साल में अगर कोई काम सबसे ईमानदारी और रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार से हुआ है, तो वह है केवल शिलान्यास का कार्य। हर गली, नुक्कड़ और चौराहे पर शिलान्यास के पत्थर सिर्फ इसलिए गाड़े गए हैं ताकि बजट को ठिकाने लगाया जा सके और बंदरबांट कर अपनी जेबें भरी जा सकें। दौरे के दौरान वर्तमान नगर पंचायत प्रशासन के खिलाफ वार्ड वासियों का आक्रोश साफ दिखाई दिया। पूर्व अध्यक्ष ने तीखे शब्दों में ललकारते हुए कहा, ममता सिंह शर्म करो, रेणुकूट नगर पंचायत प्रशासन शर्म करो। जनता अब इस तानाशाही और छलावे के विकास को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने वर्तमान बोर्ड को दो टूक चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर वार्ड संख्या 3 और 5 सहित पूरे नगर की साफ-सफाई, जर्जर सड़कों की मरम्मत, पेयजल आपूर्ति और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को सुचारू नहीं किया गया, तो वे देवतुल्य जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए नगर पंचायत कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस मौके पर बड़ी संख्या में जागरूक युवा, सम्मानित बुजुर्ग और स्थानीय महिलाएं वर्तमान तंत्र के खिलाफ आक्रोश जताने के लिए उपस्थित रहीं।

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