सोनभद्र प्राचीन शिवाजी तालाब पर विश्व हिंदू महासंघ मातृशक्ति ने धूमधाम से मनाया गुरु पूर्णिमा पूजा-अर्चना के बाद लगा विशाल भंडारा
महामंडलेश्वर मां किरण नंद गिरी की गरिमामयी उपस्थिति व मातृशक्ति जिलाध्यक्ष ममता सोनी के नेतृत्व में हुई विशेष पूजा-अर्चना
शिव भक्ति में लीन होकर श्रद्धालुओं के लिए आयोजित किया गया भव्य भंडारा
जिलाध्यक्ष ममता सोनी ने बताया गुरु पूर्णिमा का महत्व कहा— गुरु अज्ञान के अंधकार से निकालकर दिखाते हैं ज्ञान का मार्ग
पूर्वा टाइम्स – समाचार
सोनभद्र -जनपद सोनभद्र के प्राचीन एवं पौराणिक शिवाजी तालाब प्रांगण में विश्व हिंदू महासंघ मातृशक्ति सोनभद्र के तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर श्री श्री 1008 श्री महामंडलेश्वर मां किरण नंद गिरी (विश्व हिंदू महासंघ क्षेत्रीय अध्यक्ष – काशी एवं प्रयागराज मंडल) की गरिमामयी उपस्थिति रही। मातृशक्ति की जिलाध्यक्ष ममता सोनी के कुशल नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं और स्थानीय श्रद्धालुओं ने एकजुट होकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्राचीन शिवाजी तालाब स्थित मंदिर परिसर में मातृशक्ति कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। शिव भक्ति में लीन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर महाआरती की और क्षेत्र की सुख, समृद्धि व जन-कल्याण की कामना की।
धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजन संपन्न होने के उपरांत भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं, राहगीरों व स्थानीय नागरिकों ने प्रसाद ग्रहण किया।उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मातृशक्ति जिलाध्यक्ष ममता सोनी ने सनातन संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा और गुरु पूर्णिमा के पौराणिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला ममता सोनी ने कहा कि सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा में गुरु को भगवान से भी उच्च स्थान दिया गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाले शिक्षक नहीं होते, बल्कि वे शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से खींचकर ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाने वाले सच्चे पथ-प्रदर्शक होते हैं।आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व इसी महान गुरु-शिष्य परंपरा, श्रद्धा और कृतज्ञता को समर्पित है। उन्होंने आगे बताया कि इस पावन तिथि का सीधा संबंध महर्षि वेद व्यास जी से है। महर्षि वेद व्यास जी ने मानव जाति के कल्याण और वेदों के अध्ययन को सुगम बनाने हेतु उन्हें चार भागों— ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में विभाजित किया। उन्होंने 18 पुराणों, श्रीमद्भागवत और महान महाकाव्य महाभारत की रचना कर मानव समाज को ज्ञान का अमूल्य भंडार सौंपा। वेदों और शास्त्रों का संपूर्ण ज्ञान मानव जाति को प्रदान करने के कारण महर्षि वेद व्यास जी को प्रथम गुरु माना जाता है। यही कारण है कि इस शुभ तिथि को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है और इस दिन व्यास पूजन की विशेष परंपरा है। कार्यक्रम के अंत में जिलाध्यक्ष ममता सोनी ने सभी कार्यकर्ताओं और सोनभद्रवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
इस शुभ अवसर पर विश्व हिंदू महासंघ मातृशक्ति सोनभद्र की जिला उपाध्यक्ष पुष्पा रानी, जिला प्रभारी चंचला देवी, जिला मंत्री उर्मिला सोनी, दुद्धी नगर अध्यक्ष बसंती सिंह,
नगर उपाध्यक्ष संजू तिवारी,नगर महामंत्री गायत्री देवी,नगर मंत्री उदाय देवी, सहित संगठन की अनेक पदाधिकारी, निष्ठावान कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।









