निर्जला एकादशी महासंयोग पर माँ गंगा की महाआरती

रवि, शिव और सिद्ध समेत 4 योग का महासंयोग: अध्यक्ष अमरदीप गुप्ता

गोरखपुर। सूर्यकुण्ड धाम जीर्णोद्धार समिति द्वारा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर माँ गंगा की विशेष महाआरती का आयोजन सूर्यकुण्ड धाम सरोवर पर किया गया। श्रद्धालु बड़ी संख्या शामिल होकर अपनी आस्था, श्रद्धा निवेदित किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भाग प्रचार प्रमुख तरुण उदय प्रताप रहे।
सर्व प्रथम आरती टोली की उपाध्यक्ष हेमा शर्मा ने मुख्य मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन की गई। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत भी अर्पित की गई। घी का अखण्ड दीपक जला कर विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया गया। वही धाम प्रांगण में स्थित अहिल्या बाई होलकर वैदिक पुस्तकाल में सामूहिक श्रीमद्भागवत गीता का पाठ किया गया। उसके पश्चात शुरू हुई माँ गंगा की पावन महाआरती। इस दौरान हर हर गंगे की जयघोष से पूरा प्रांगण गूँज उठा, माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो उठा। घंट घड़ियाल गूंज रहे थे। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया।

समिति के अध्यक्ष अमरदीप गुप्ता ने बताया धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी को भीम एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के कहने पर यह व्रत रखा था। तभी से यह व्रत भीम एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

उन्होंने बताया ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाली निर्जला एकादशी का इंतजार भगवान विष्णु के भक्त पूरे साल करते हैं। मान्यता है कि यह साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक होती है। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिलता है। खास बात यह है कि इस बार एकादशी पर रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिन्हें पूजा-पाठ के लिए अच्छा माना जाता है।

निर्जला एकादशी का महत्व बताते हुए मुख्य अतिथि तरुण उदय प्रताप ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखा जाता है। इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। माना जाता है कि नियमपूर्वक किया गया यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा दिलाता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। कई लोग इस दिन जल से भरा घड़ा, छाता, वस्त्र और फल का दान भी करते हैं। इन तीनों शुभ योगों में भगवान विष्णु व लक्ष्मी जी की पूजा, दान, जप और धार्मिक अनुष्ठान करने से विशेष पुण्य और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से समिति के अध्यक्ष अमरदीप गुप्ता, सचिव शीतल कुमार मिश्रा, महामंत्री मुकेश गोंड, मंत्री धनंजय, रविन्द्र नाथ दुबे, शशिकांत पाण्डेय, कोषाध्यक्ष अनंत नारायण पाल, सूरज चौधरी, नितिन वर्मा, अहिल्या बाई होलकर वैदिक पुस्तकाल प्रभारी राधेश्याम सिंह, लाली, राधा, प्रियंका सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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