ट्रेनी डीएफएओ की कार्यवाही से नाराज होकर बुढिया माता का बंद किया कपाट
दो दिन पहले वहां के पुजारी के बेटे की बाइक का किया गया था चालान
चार घंटे बंद रहा कपाट, वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर दिया आश्वासन तब खुला कपाट
पूर्वा टाइम्स समाचार

गोरखपुर। एम्स थाना क्षेत्र के कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माता मंदिर का कपाट शुक्रवार को ट्रेनी डीएफओ की कार्यवाही के विरोध में सुबह से ही बंद रहा। यहां तक की वहां के दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें बंद रखीं। उनका आरोप था कि मनमाने तरीके से बुढिया माता मंदिर आने जाने वाले लोगों की गांडियों को अधिकारियों द्वारा चालान किया जा रहा है और उन्हें परेशान किया जा रहा है। कपाट चार घंटे बंद रहा। जिसके बाद वन विभाग के अधिकारी डॉ हरेंद्र मौके पर पहुंचे और उचित कार्यवाही का आश्वासन देकर कपाट खुद पूजा कर खुलवाया। जिसके बाद मामला शांत हुआ। इस दौरान ट्रेनी डीएफओ की गाडी पर लोगों ने चप्पलें फेंक कर व मुर्दाबाद के नारे लगाकर अपनी नाराजगी भी जताई। जानकारी के अनुसार आरोप है कि वृहस्पतिवार की शाम बुढ़िया माता मंदिर के पुजारी का बेटा बलिराम मंदिर से जंगल के रास्ते वनटांगिया टोले की तरफ जंगल की पगडंडी से जा रहा था। जंगल के रास्ते मे ही उसे ट्रेनी डीएफओ सीकर वेंकट पटेल ने उसे रोक लिया तथा वन संरक्षित क्षेत्र में घूमने का हवाला देते हुए उसकी गाड़ी जब्त कर ली। इसकी जानकारी होने पर शुक्रवार की सुबह मंदिर के पुजारी रामानंद ने मंदिर की साफ सफाई के बाद उक्त कार्यवाही के विरोध में मंदिर का कपाट बंद कर दिया। जिसके बाद विरोध में सभी दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर एकत्रित हो गए और वन विभाग के अंडरट्रेनी डीएफओ सीकर वेंकट पटेल के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इसकी सूचना पर वन विभाग के एसडीओ डॉ हरेन्द्र सिंह व अन्य अधिकारी एम्स पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जब्त की गई गाड़ी दिलाने के साथ साथ आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह की कोई कार्यवाही वन विभाग के द्वारा नही की जाएगी। उनके आश्वासन के बाद मंदिर के पुजारी और दुकानदार मान गए तथा एसडीओ डॉ. हरेंद्र सिंह ने मंदिर के कपाट खुलने के साथ पूजा अर्चना किया। तब जाकर लोग सामान्य रूप से पूजा अर्चन करने लगे। इस संबंध में डीएफओं विकास यादव ने बताया कि पुुजारी के बेटे वन विभाग के पगडंडी का रास्ता लेकर जा रहे थे। जो वन विभाग द्वारा प्रतिबंधित है और वहां पर पौधरोपड भी किया गया है। उन्हें पहले भी वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा चेतावनी दी गई थी। इसी से नाराजगी थी। लेकिन उन्हें समझा कर मामला शांत करा दिया गया है। बुढिया माता मंदिर जाने वाले रास्ते पर कोई रोक नहीं है।








