शोधपीठ में योग कार्यशाला के चौथे दिन आयोजित हुआ योग प्रशिक्षण कार्यक्रम
पूर्वा टाइम्स समाचार
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ द्वारा कुलपति प्रो. पूनम टण्डन के संरक्षण में चल रहे सप्तदिवसीय शीतकालीन योग कार्यशाला विषय ’योग एवं दर्शन’ दिनांक 20 दिसम्बर को योग प्रशिक्षण के चौथे दिन भी प्रतिभागियों की काफी संख्या रही। योग प्रशिक्षण डा. विनय कुमार मल्ल के द्वारा दिया गया। चक्रासन, मकरासन सहित योग प्रशिक्षण में लगभग 30 लोगों ने भाग लिया। इसमें स्नातक, परास्नातक, शोध छात्र आदि विद्यार्थी एवं अन्य लोग सम्मिलित हुए। आनलाइन माध्यम से महर्षि पतंजलि के योग दर्शन की उपादेयता विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि के स्वागत के साथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशलनाथ मिश्र जी के द्वारा हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. संजय कुमार राम, समन्वयक, दर्शनशास्त्र विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय रहे। उन्होंने योग दर्शन की उपादेयता की चर्चा करते हुए कहा कि योग सूत्र पर वाचस्पति मिश्र का तत्ववैशारदी योगदर्शन के अध्ययन हेतु प्रामाणिक ग्रंथ है। सांख्य एवं पतंजलि का दर्शन एक दूसरे से घनिष्ठ संबंध रखते है। योग ने ईश्वर को स्वीकार कर साधना में उपयोगी मानकर ईश्वर की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने चित्त, वृति, चित्त वृत्ति की भूमि, सिद्धि, क्लेश, योग के अंग आदि पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। व्याख्यान में कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ के रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुनील कुमार द्वारा किया गया। शोधपीठ के के सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह द्वारा मुख्य वक्ता एवं समस्त श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। शोधपीठ के सहायक ग्रन्थालयी डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. हर्षवर्धन सिंह, चिन्मयानन्द मल्ल आदि उपस्थित रहे। डॉ. राकेश दुबे आदि ने प्रश्न भी पूछा जिसका वक्ता ने उत्तर दिया। विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्य सहित डॉ. श्रीनिवास मिश्र, डॉ. मनोज कुमार यादव आदि जुड़े रहे।








