चोपन रेलवे रामलीला का 85 फीट ऊंचा रावण बन रहा आकर्षण का केंद्र, पूर्वांचल के सबसे बड़े रावण के निर्माण को अंतिम रूप देने में जुटे कारीगर

चारों दिशाओं में घूमने वाले दस सिर और अट्टहास की गर्जना होगी खास आकर्षण, रावण के निर्माण पर आएगा करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च

पूर्वा टाइम्स – ब्यूरो
सोनभद्र _चोपन, विजयादशमी के पर्व को लेकर चोपन में उत्साह का माहौल बनने लगा है। चोपन रेलवे रामलीला मैदान में हर वर्ष की तरह इस बार भी विशालकाय रावण के पुतले का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। पुतले को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। रावण के पुतले को अंतिम रूप देने में जुटे कारीगरों की कलाकारी और मेहनत लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। लगभग 85 फीट ऊंचा यह रावण चोपन रेलवे रामलीला की प्रमुख पहचान माना जाता है। आयोजकों के अनुसार, इसे पूर्वांचल के सबसे बड़े रावण पुतलों में शामिल किया जाता है।

रामलीला समिति के अध्यक्ष कमल किशोर सिंह, रावण प्रभारी सुरेश जायसवाल एवं सियाराम तिवारी ने बताया कि चोपन रेलवे रामलीला में रावण के पुतले का निर्माण विशेष आकर्षण को ध्यान में रखकर कराया जाता है। इस विशालकाय पुतले के निर्माण की जिम्मेदारी कारीगर प्रमोद विश्वकर्मा उर्फ बप्पी की देखरेख में पूरी की जा रही है। पुतले की ऊंचाई लगभग 85 फीट रखी जाती है, जिससे दशहरा के दिन रावण दहन देखने पहुंचने वाले लोगों को भव्य नजारा देखने को मिलता है।
चारों दिशाओं में घूमते दस सिर होंगे खास आकर्षण
चोपन रेलवे रामलीला के रावण पुतले की सबसे बड़ी विशेषता उसके दस कंदरों का अनूठा स्वरूप है। पुतले के दस सिर चारों दिशाओं में घूमते हैं और उसकी अट्टहास करती गर्जना दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनती है। आधुनिक तकनीक और कारीगरों की कुशलता से तैयार किया जाने वाला यह स्वरूप रावण के पुतले को अन्य सामान्य पुतलों से अलग पहचान देता है। दशहरा के अवसर पर जब विशालकाय रावण लोगों के सामने खड़ा होता है, तो उसका भव्य आकार और घूमते हुए सिर लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनते हैं।
डेढ़ लाख रुपये में तैयार होता है विशालकाय रावण
रावण के इतने विशाल पुतले का निर्माण करना आसान काम नहीं है। इसके लिए बांस, लकड़ी, कागज, कपड़े और अन्य आवश्यक सामग्रियों के साथ-साथ कुशल कारीगरों की मेहनत भी जरूरी होती है। रामलीला समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, इस विशालकाय रावण के निर्माण पर लगभग एक लाख पचास हजार रुपये यानी डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है। पुतले की संरचना तैयार करने से लेकर उसके दस सिरों, चेहरे की बनावट और अन्य आकर्षक हिस्सों को अंतिम रूप देने तक कारीगरों को काफी मेहनत करनी पड़ती है

परंपरा और आस्था का प्रतीक है चोपन रेलवे रामलीला
चोपन रेलवे रामलीला क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा प्रमुख आयोजन है। हर वर्ष विजयादशमी के अवसर पर रामलीला और रावण दहन को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। विशालकाय रावण का निर्माण इस आयोजन की भव्यता को और बढ़ा देता है। रावण दहन के माध्यम से भगवान श्रीराम की विजय तथा बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है।
स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा उत्सव भी है। रावण के पुतले को अंतिम रूप देने में जुटे कारीगरों की मेहनत इस आयोजन को विशेष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अब लोगों को विजयादशमी के दिन का इंतजार है, जब चोपन रेलवे रामलीला मैदान में 85 फीट ऊंचे विशालकाय रावण का भव्य स्वरूप आकर्षण का केंद्र बनेगा।

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