हरित विश्वविद्यालय रैंकिंग 2026 में एमएमएमयूटी को देशभर में 31वां स्थान, गोल्ड रेटिंग से सम्मानित

गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय ने नेशनल ग्रीन यूनिवर्सिटी रैंकिंग (एनजीयूआर) 2026 में देशभर में 31वां स्थान प्राप्त करते हुए 90.2 अंक (100 में से) अर्जित किए हैं। उत्कृष्ट पर्यावरणीय प्रबंधन, जलवायु संरक्षण तथा सतत परिसर विकास के लिए विश्वविद्यालय को प्रतिष्ठित गोल्ड रेटिंग प्रदान की गई है।

एनजीयूआर भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों की सतत विकास संबंधी पहल का व्यापक मूल्यांकन एवं मान्यता प्रदान करने वाला राष्ट्रीय मंच है। इस रैंकिंग में विश्वविद्यालयों का आकलन साक्ष्य आधारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है। मूल्यांकन के दौरान संस्थागत नीतियों, सुशासन, पर्यावरण प्रबंधन, शिक्षण एवं शोध में सतत विकास के समावेश, नवाचार, सामुदायिक सहभागिता तथा विभिन्न पर्यावरणीय पहलों का विस्तृत परीक्षण किया गया। इसके साथ ही ग्रीन ऑडिट, ऊर्जा एवं जल ऑडिट, पर्यावरणीय नीतियों, शोध प्रकाशनों, नवाचारों, जीआईएस आधारित अभिलेखों, प्रमाणपत्रों तथा मापनीय पर्यावरणीय उपलब्धियों से जुड़े दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया।

एनजीयूआर की 100 अंकों की मूल्यांकन प्रणाली के अंतर्गत संस्थानों का आकलन दस प्रमुख मानकों पर किया जाता है। इनमें सुशासन, शिक्षण में सतत विकास का समावेश, शोध एवं नवाचार, ऊर्जा प्रबंधन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु कार्रवाई, हरित परिसर संचालन तथा सामुदायिक सहभागिता शामिल हैं।

विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि हरित परिसर के विकास, ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग, जल संसाधन प्रबंधन, अपशिष्ट न्यूनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, सतत अवसंरचना, पर्यावरणीय शिक्षा तथा हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए जा रहे शोध एवं नवाचार का परिणाम है। साथ ही, इसमें शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है।

इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान पूरे एमएमएमयूटी परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि देश में 31वां स्थान और गोल्ड रेटिंग प्राप्त होना विश्वविद्यालय की पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और उत्तरदायी संस्थागत प्रशासन के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय शिक्षकों, शोधार्थियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों एवं सभी हितधारकों को देते हुए कहा कि यह सम्मान हरित प्रौद्योगिकी, सतत अवसंरचना, जलवायु अनुकूलन और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रेरित करेगा।

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