बघाड़ू प्रकरण पर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर हाई कोर्ट की ‘मुहर’

जनजातीय महिला द्वारा धर्मांतरण के बाद एससी-एसटी से खरीदी गई भूमि को प्रशासन ने ग्राम सभा में किया था निहित

जिला प्रशासन की चुस्त पैरवी से ध्वस्त हुए बहादुर अली के मंसूबे

हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन की कार्रवाई को ठहराया जायज।

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का पालन करते हुए जिला प्रशासन ने की थी सख्त कार्रवाई

जालसाजी कर हड़पी गई भूमि पर समाज सुधारक बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करने की चल रही तैयारी, बनेगा खेल का मैदान और बारात घर

पूर्वा टाइम्स – ब्यूरो

सोनभद्र। लैंड जिहाद के विरुद्ध योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की एक बड़ी जीत हुई है। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जनजाति की महिला के मुस्लिम बहादुर अली से निकाह एवं धर्मांतरण के बाद जनजातीय समाज से खरीदी गई भूमि के विरुद्ध जिला प्रशासन की कार्रवाई को जायज करार देते हुए किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से इनकार किया है। जिला प्रशासन ने महिला रजिया उर्फ नन्हकी द्वारा धर्मांतरण के बाद जालसाजी कर खुद को अनुसूचित जनजाति का दर्शाते हुए कराए गए सभी बैनामों को शून्य घोषित कर भूमि को ग्राम सभा में निहित किया था। वहीं दूसरी ओर, माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के साथ ही मास्टरमाइंड बहादुर अली द्वारा जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) परिवर्तन के लिए जनजातीय समाज की हड़पी गई भूमि पर अब जन उपयोगी निर्माण की तैयारी भी जिला प्रशासन ने शुरू कर दी है। जल्द ही भूमि पर खेल का मैदान व विवाह मंडप का निर्माण किए जाने के साथ ही समाज सुधारक बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित किए जाने की भी तैयारी चल रही है।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ नेशं बताया कि झारखंड की सीमा से सटे दुद्धी के बघाड़ू गांव में आदिवासियों की जमीनों पर बहादुर अली द्वारा पत्नी के नाम पर जालसाजी कर हड़पने का प्रकरण संज्ञान में आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की। बताया कि बहादुर अली ने जनजातीय समाज की महिला रजिया से निकाह के पश्चात दस्तावेजी हेरफेर कर उसे जनजातीय समाज का ही दर्शाते हुए एससी-एसटी की 30 से अधिक जमीनों की खरीद की थी। बाद में बहादुर अली ने यह जमीनें झारखंड, बिहार व छत्तीसगढ़ में रहने वाले अपने रिश्तेदारों को दे दीं। जिला प्रशासन ने मास्टरमाइंट बहादुर अली द्वारा जालसाजी कर पत्नी रजिया की पुरानी पहचान पर एससी-एसटी समाज द्वारा कराए गए सभी बैनामों को शून्य घोषित कर 40 गाटों की 5.7142 हेक्टेयर भूमि को ग्राम सभा में निहित कर दिया था। जिलाधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन की कार्रवाई के विरुद्ध रजिया ने अप्रैल माह में माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जहां प्रकरण पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति अरुण कुमार की पीठ ने जिला प्रशासन के बैनामों को कानूनन शून्य घोषित कर विवादित जमीनों को ग्राम सभा में निहित करने के आदेश को सही ठहराते हुए किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अमल करते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करने के साथ ही उच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जिससे 5 माह से भी कम समय में ही न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया।
हड़पी गई जमीनों पर अब होगा जन उपयोगी निर्माण*
जिलाधिकारी ने बताया कि बहादुर अली द्वारा एससी-एसटी समाज की साजिशन हड़पी गई भूमि पर जन उपयोगी निर्माण कराए जाएंगे। क्षेत्र के बच्चों के शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए खेल का मैदान व एक बरात घर का निर्माण कराया जाएगा। जिससे आसपास के लोगों को वैवाहिक कार्यक्रमों में सहूलियत होगी। इसके साथ ही महान समाज सुधारक बिरसा मुंडा की प्रतिमा की स्थापना के लिए भी जरूरी कार्रवाई की जा रही है। शेष भूमि पर शासकीय भवनों का निर्माण कराया जाएगा।
जनजाति परंपरा से जुड़ाव का कोई साक्ष्य नहीं पेश कर सकी रजिया
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दशकों से दूसरे धर्म और रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन यापन कर रहा है और अपने मूल समुदाय से उसका जुड़ाव, मान्यता और प्रथाएं खत्म हो चुकी हैं तो वह अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले विधिक संरक्षण का दावा नहीं कर सकता। याची ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं पेश कर सकी जिससे यह साबित हो कि मुस्लिम रीति से शादी और कई दशकों तक अलग पहचान में रहने के बावजूद वह पनिका जनजाति की परंपराओं से जुड़ी रही या उस समाज ने उन्हें अपने सदस्य के रूप में स्वीकार किया हुआ है।

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