कांग्रेस में जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर 17 दावेदार, महिला चेहरे ने बढ़ाई सियासी हलचल!
पूर्वा टाइम्स -आनन्द कुमार चौबे
सोनभद्र । आदिवासी बाहुल्य सोनभद्र में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। संगठन सृजन अभियान के बाद जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष के पदों को लेकर पार्टी के भीतर मंथन तेज हो गया है। जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में कुल 17 प्रत्याशी शामिल बताए जा रहे हैं, जिसमें महिला दावेदार भी शामिल हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी संगठन की कमान किसी अनुभवी पुराने चेहरे को सौंपेगी, नए नेतृत्व पर भरोसा जताएगी या फिर महिला चेहरे को आगे कर सोनभद्र की सियासत में नया संदेश देगी।
माना जा रहा है कि 15 सितंबर तक या इसके बाद नए जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष के नामों का ऐलान हो सकता है। घोषणा की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, दावेदारों की सक्रियता और समर्थकों की लामबंदी भी बढ़ती जा रही है।
17 दावेदारों में महिला चेहरे भी, किस पर लगेगा हाईकमान का दांव –
जिलाध्यक्ष पद के लिए कुल 17 प्रत्याशियों के मैदान में होने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। खास बात यह है कि इस दौड़ में महिला दावेदार भी शामिल हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या कांग्रेस इस बार महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाकर संगठन में बड़ा संदेश देगी?
सरकार के महिला आरक्षण संशोधन बिल के विरोध में मुखर रही कांग्रेस यदि सोनभद्र में पहली बार महिला जिलाध्यक्ष के रूप में किसी चेहरे को आगे करती है तो इसे पार्टी की रणनीतिक पहल के तौर पर देखा जा सकता है। इससे महिला कार्यकर्ताओं को संगठन में बड़ी भूमिका मिलने का संदेश जाने के साथ महिला मतदाताओं के बीच भी पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।
पुराने बनाम नए चेहरों की जंग –
जिलाध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की संख्या बढ़ने के साथ पार्टी के भीतर अलग-अलग खेमों की सक्रियता भी बढ़ गई है। एक खेमा संगठन में लंबे समय से सक्रिय और अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देने की पैरवी कर रहा है, तो दूसरा खेमा नए चेहरों को आगे लाकर संगठन में नई ऊर्जा भरने की वकालत कर रहा है।
दावेदारों के समर्थक अपने-अपने नेताओं के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। ऐसे में 17 नामों में से हाईकमान किस चेहरे को संगठन की कमान सौंपता है, इस पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से लेकर राजनीतिक हलकों तक की नजर टिकी हुई है।
पर्यवेक्षक के दौरे के बाद बढ़ी थी हलचल –
पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश पर्यवेक्षक के सोनभद्र दौरे के बाद संगठनात्मक बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। पर्यवेक्षक ने जिले की चारों विधानसभा सीटों के स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठन की जमीनी स्थिति, सक्रिय कार्यकर्ताओं और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर फीडबैक लिया।
संगठन सृजन अभियान के दौरान मिले फीडबैक के बाद संभावित नामों पर पार्टी स्तर पर मंथन शुरू हुआ है। इसके बाद जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष के दावेदारों की सक्रियता और तेज हो गई है।
विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को धार देने की तैयारी –
कांग्रेस की नजर अब संगठन को बूथ और क्षेत्रीय स्तर तक मजबूत करने पर है। ऐसे में जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष का चयन पार्टी के लिए महज संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
सोनभद्र जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में संगठन की कमान किसके हाथ जाती है, इसका सीधा असर पार्टी की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। यहीं वजह है कि 17 दावेदारों के बीच मुकाबला लगातार रोचक होता जा रहा है।
“बहरहाल 17 दावेदारों के बीच जिलाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर चल रही सियासी कवायद ने सोनभद्र कांग्रेस के भीतर हलचल बढ़ा दी है। पुराने और अनुभवी चेहरों की दावेदारी के बीच नए नेतृत्व की पैरवी और महिला दावेदारों की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब हाईकमान के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। किसे संगठन की कमान मिलती है, यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीति और राजनीतिक दिशा का संकेत भी होगा। वहीं ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो कुछ दिनों में सामने आ ही जाएगा, लेकिन जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर होने वाला फैसला सोनभद्र कांग्रेस के सियासी भविष्य की नई तस्वीर जरूर खींचेगा।”


