राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन जागरूकता कार्यक्रम संपन्न

गोरखपुर। स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) रेलविहार, राप्तीनगर, गोरखपुर के प्रांगण में आज देश को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से ‘राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ के अंतर्गत एक वृहद स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बाबा राघव दास (B.R.D.) मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का कुशल एवं सुव्यवस्थित संचालन विद्यालय की उप प्रधानाचार्या रुक्मिणी उपाध्याय द्वारा किया गया।कार्यक्रम के प्रथम सत्र की प्रस्तावना रखते हुए विद्यालय के आदरणीय प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर ने सभी आगंतुक चिकित्सकों का स्वागत किया। अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “टीबी (क्षय रोग) जैसी घातक बीमारी समाज के हर वर्ग और उम्र के व्यक्ति को प्रभावित करती है। यह केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की मानसिक और आर्थिक स्थिति को कमजोर कर देती है। एक जागरूक समाज ही इस बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंक सकता है। विद्यालय के भैया-बहनों को इस अभियान का दूत बनकर अपने आस-पास के लोगों को जागरूक करना चाहिए।”कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. औसाफ ने क्षय रोग के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह रोग ‘माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ नामक जीवाणु से फैलता है। उन्होंने इसके प्रकारों (जैसे फेफड़ों की टीबी, हड्डियों की टीबी आदि) और लक्षणों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगातार दो हफ्ते से अधिक खांसी आना, शाम को बुखार आना और वजन का तेजी से घटना इसके मुख्य लक्षण हैं।बचाव और उपचार की चर्चा करते हुए डॉ. औसाफ और मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम के अन्य सम्मानित सदस्यों— डॉ. ऐश्वर्या, डॉ. शशांक, डॉ. नीरजा शर्मा डॉ. मानव ने बताया कि इस बीमारी से घबराने की आवश्यकता नहीं है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर इसकी पूरी जांच और दवाएं पूरी तरह निःशुल्क (मुफ्त) उपलब्ध हैं। सरकार द्वारा संचालित ‘डॉट्स’ (DOTS – डायरेक्ट ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट शॉर्ट-कोर्स) कार्यक्रम टीबी को पूरी तरह ठीक करने में अचूक साबित हुआ है। डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि मरीजों को दवाओं का कोर्स बीच में कभी नहीं छोड़ना चाहिए। इसके साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हरी सब्जियां, फल, दूध और प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार का सेवन अत्यंत आवश्यक है।स्वास्थ्य के प्रति चेतना जगाते हुए उप प्रधानाचार्या रुक्मिणी उपाध्याय ने कहा, “स्वच्छता और सजगता ही किसी भी बीमारी से बचने का पहला कदम है। हमारे देश से क्षय रोग तभी समाप्त होगा जब हम सब मिलकर स्वास्थ्य नियमों का पालन करेंगे। बच्चों को अपने खान-पान में जंक फूड को छोड़कर पारंपरिक और पौष्टिक आहार को अपनाना चाहिए।”कार्यक्रम के अंतिम चरण में बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज से पधारे सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों (डॉ. ऐश्वर्या, डॉ. शशांक, डॉ. औसाफ, डॉ.मानव ,डॉ. नीरजा शर्मा) का धन्यवाद करते हुए प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर ने आभार ज्ञापित किया। उन्होंने इस ज्ञानवर्धक सत्र के लिए पूरी टीम की सराहना की। अंत में सामूहिक कल्याण मंत्र के पाठ के साथ इस सफल जागरूकता कार्यक्रम का समापन हुआ।

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