शोधपीठ में योग कार्यशाला के दूसरे दिन आनलाईन व्याख्यान के साथ आयोजित हुआ योग प्रशिक्षण कार्यक्रम

पूर्वा टाइम्स समाचार

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ द्वारा कुलाधिपति माननीय आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं कुलपति प्रो. पूनम टण्डन के संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 के उपलक्ष्य में चल रहे सप्तदिवसीय ग्रीष्म कालीन योग कार्यशाला के दूसरे दिन आनलाईन व्याख्यान का आयोजन किया गया। सुबह 8 बजे योग प्रशिक्षण के दूसरे दिन भी प्रतिभागियों की काफी संख्या रही। योग प्रशिक्षण डा. विनय कुमार मल्ल के द्वारा दिया गया। विभिन्न आसन, ध्यान सहित योग प्रशिक्षण में लगभग 30 लोगों ने भाग लिया। इसमें स्नातक, परास्नातक, शोध छात्र आदि विद्यार्थी एवं अन्य लोग सम्मिलित हुए।अपरान्ह 3 बजे आनलाइन माध्यम से योग दर्शन के प्रसार में योग मार्तंड का अवदान विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि के स्वागत के साथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशलनाथ मिश्र जी के द्वारा हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. लक्ष्मी मिश्रा, सह आचार्य, संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली रहे। डॉ. लक्ष्मी मिश्रा ने अपने व्याख्यान मे कहा कि योग मार्तंड योग का एक महत्त्वपूर्ण शास्त्रीय ग्रंथ है। इसमें कुल 203 श्लोक है, जिसमें हठयोग का उपदेश दिया गया है। हठयोग की साधना जीवात्मा और परमात्मा के साक्षात्कार का सबसे उत्तम साधन है। हठयोग के महत्व की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हठयोग की साधना दैहिक, दैविक तथा आधिभौतिक तापों से बचाता है। उन्होंने योग मार्तंड में वर्णित विविध विषयों प्राण, अपान, नाड़ी, चक्र, मुद्रा आदि पर विस्तृत चर्चा किया। उन्होंने कहा कि इनका अभ्यास गुरु के निर्देशन में करना चाहिए, अन्यथा इसका दुष्प्रभाव सामने आता है। साधक के आहार की चर्चा करते हुए कहा कि साधक को दूध का सेवन करना चाहिए। उसे लवण तथा अम्ल रस युक्त आहार से बचना चाहिए। इस आनलाइन व्याख्यान में कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ के रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुनील कुमार द्वारा किया गया। शोधपीठ के वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. हर्षवर्धन सिंह द्वारा मुख्य वक्ता एवं समस्त श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। शोधपीठ के सहायक ग्रन्थालयी डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, चिन्मयानन्द मल्ल आदि उपस्थित रहे। अर्चना, अंबिका, राणा प्रताप, हरदीप, आर. यादव आदि ने प्रश्न भी पूछा जिसका वक्ता ने उत्तर दिया। विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्य सहित डॉ. सोनल सिंह आदि जुड़े रहे।

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