प्रदर्शनी में रविवार की शाम कवियों एवं शायरों के रही नाम
रिपोर्ट पूर्व टाइम्स
गोरखपुर 15 दिवसीय मंडल स्तरीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी के दूसरे दिन की शाम चंपा देवी पार्क में कविता और शायरी से गुलजार रही नव्य इंडिया एंटरटेनमेंट के सौजन्य से कवियों एवं शायरों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया गोरखपुर के रामगढ़ ताल स्थित चंपा देवी पार्क में लोगो ने एक तरफ भरपूर खरीदारी की वही दूसरी तरफ लोग श्रोता के रूप में कवि सम्मलेन का आनंद लिया। साथ ही प्रदर्शनी की सजावट व साफ-सफाई की बाते करते हुए लोंगो ने प्रदर्शनी की बहुत प्रशंसा की।कार्यक्रम की शुरुआत के लिए मंच संचालक वकार वाहिद ने सरस्वती वंदना के लिए रोहन मिश्र ‘‘निष्पक्ष‘‘ को आवाज दी। उन्होंने माँ वीणा वादिनी की आराधना के बाद ‘बनाई किसने बला की तेरी ये सूरत है, ये जो सूरत है वो दुनिया के लिए नेमत है। सँभाले रखना खुद को अच्छे से, अच्छे लोगों, आप जैसों से ही दुनिया ये खूबसूरत है। सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। रोहन मिश्र निष्पक्ष के बाद मंच पर पधारे कवि अमर हिंदुस्तानी ने निशानी था अहिंसा का जो वो प्रह्लाद लिखता हूँ, हुआ मीरा का कान्हा से जो वो संवाद लिखता हूँ, दिलाई जिसने आजादी अहिंसा वाली लाठी से, मैं बापू का पुजारी हूँ, मैं गाँधीवाद लिखता हूँ। सुनाया तो लोग भाव विभोर हो उठे। कवियत्री नेहा मिश्रा की भोजपुरी रचना ध्यान छन-छन धनुर्धर क धइली सिया, केहू बोले कहां चूक कइली सिया, काहें फिर जानकी जी पे अंगुरी उठले, फेर काहें धरा में समइली सिया। जब सुनाया तो श्रोता दर्शक नेहा मिश्रा के साथ सुर में सुर मिलाने लगे। मंच पर अब बारी थी युवा दिलों की धड़कन शायर सलीम मजहर की। उन्होंने शिकायत पीठ पीछे वो मेरी दिन रात करता है। वही मिलता है जब मुझसे तो हंस कर बात करता है। सलीम उसको बालाओं से कोई खतरा नहीं होता । खुदा की राह मे जो सदका ओ खैरात करता है। सुनाया तो श्रोता एक बार फिर, एक बार फिर के नारे बुलंद करने लगे। कवि रुद्रा उत्कर्ष शुक्ल ने नींद आती नहीं है सुला दीजिए, मेरी आंखें हैं बंजर रुला दीजिए।


क्या पता कुछ सकूं सा मिले जिंदगी में, मैं जिंदा हूं मुझको बता दीजिए।श् सुनाया। रुद्रा उत्कर्ष शुक्ल की रचनाये लोगो को खूब पसंद आई। कार्यक्रम के संचालक वकार वाहिद ने जिस कलाई के लिए हमने कमाए कंगन, उस कलाई ने किसी गैर की चूड़ी पहनी जैसी अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से कवि सम्मलेन को एक नई दिशा दी। युवा कवियत्री पल्लवी शर्मा ने एक मालिक की सब सन्तानें, चाहे हो जिस भेष में। आओ मिलकर दीप जलाए, हम गाँधी के देश में। सुनकर पूज्य बापू को अपनी श्रध्दा निवेदित की। कवि उजाला उज्ज्वल ने मेरे आँगन में रखो मत ज्ञान का भंडार साधो, इस वियोगी को दिला दो बस वो बिछड़ा यार साधो, लेके मुझको जा रहे क्यों तुम हरि के द्वार साधो, एक मूरत पर गया हूँ जब हृदय को हार साधो प्रस्तुत कर कवि सम्मलेन एवं मुशायरे को यादगार बना दिया। कवियों द्वारा सुनाए गए तमाम गीत गजलों छंदों पर खूब तालियां बजीं एवं कार्यक्रम शानदार रूप से संपन्न हुआ। कवि सम्मेलन के अंत में वरिष्ठ संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी, श्री एन. पी. मौर्य उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, लखनऊ ने सभी कवि/शायरों को मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया तथा नव्य इंडिया एंटरटेनमेंट के चेयरमैन नवीन पाण्डेय ने कवियों एवं आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के अन्त में परिक्षेत्रीय अधिकारी ने शहरवासियों से विशेष आग्रह किया कि आप लोग इन कलाकारों के कार्यक्रम का लुफ्त उठायें तथा प्रदर्शनी में लगे स्टाल धारकों से उनके उत्पादों को खरीद कर उनका प्रोत्साहन करें। खादी बोर्ड की तरफ से श्री प्रमोद श्रीवास्तव, श्री विजय कुमार, श्री शिवेन्द्र सिंह, आरिफ समेत अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। प्रदर्शनी में अबतक 3.40 लाख की बिक्री हो चुकी है।








