ओबरा स्टेडियम की घोर उपेक्षा 7 दिन से चल रहे टूर्नामेंट में नगर पंचायत ने नहीं भेजा एक भी सफाईकर्मी, खिलाड़ी खुद झाड़ू लगाने को मजबूर

पूर्वांचल भर के खिलाड़ी जुटा रहे भीड़, बदइंतजामी से ओबरा की बदनामी

लिखित अनुरोध के बाद भी नहीं भेजे गए सफाईकर्मी, समिति ने जताई गहरी नाराजगी

खिलाड़ी खुद थाम रहे झाड़ू, सरकार को दिखा रहे आईना

पूर्वा टाइम्स – समाचार
ओबरा (सोनभद्र)। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूबे के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने, खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा की राजधानी के नाम से विख्यात ओबरा नगर पंचायत का अड़ियल और उदासीन रवैया कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। एशिया की पहली नंबर वन बिजली परियोजना के गौरवशाली इतिहास को समेटे ओबरा के मुख्य स्टेडियम में पिछले 7 दिनों से भव्य क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन हो रहा है। इस टूर्नामेंट में पूरे पूर्वांचल और आसपास के जिलों से बेहतरीन खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करने पहुंच रहे हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल खेल महाकुंभ के 7 दिन बीत जाने के बाद भी नगर पंचायत द्वारा स्टेडियम में एक भी सफाई कर्मचारी नहीं भेजा गया है। चारों तरफ फैली गंदगी के बीच खिलाड़ी खेलने को मजबूर हैं, जो स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। टूर्नामेंट की आयोजन समिति ने अपनी गहरी पीड़ा और नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने नगर पंचायत प्रशासन से बकायदा लिखित और औपचारिक मुलाकात की थी। समिति ने केवल प्रतिदिन मात्र 2 घंटे के लिए सफाई कर्मचारियों की मांग की थी, ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों को स्वच्छ माहौल मिल सके।
इसके बावजूद नगर पंचायत ने इस जनहित और खेल हित की मांग को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया। खेल प्रेमियों का कहना है कि वर्तमान में नगर पंचायत की कमान जिस राजनीतिक विचारधारा (समाजवादी पार्टी) के हाथों में है, क्या उसने खिलाड़ियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का जिम्मा ले लिया है? प्रदेश सरकार की मंशा के विपरीत नगर पंचायत का यह रवैया स्थानीय खेल प्रतिभाओं का मनोबल तोड़ने वाला है। नगर पंचायत की इस घोर लापरवाही के बाद ओबरा के युवाओं और टूर्नामेंट में भाग ले रहे खिलाड़ियों ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया है। स्टेडियम की सफाई के लिए किसी सरकारी अमले का इंतजार करने के बजाय, ये खिलाड़ी और आयोजन समिति के युवक खुद हाथों में झाड़ू लेकर मैदान साफ कर रहे हैं। खिलाड़ी खुद पूरा कचरा उठा रहे हैं और मैदान को खेलने योग्य बना रहे हैं। युवाओं का कहना है कि वे इस श्रमदान के जरिए सरकार और शासन तक अपनी आवाज पहुंचाना चाहते हैं कि प्रशासनिक अनदेखी के बावजूद उनका हौसला कम नहीं होगा। गौरतलब है कि इस स्टेडियम में चल रहे टूर्नामेंट का क्रेज इतना है कि यहां पूरे पूर्वांचल क्षेत्र के दूर-दराज के इलाकों से टीमें और खिलाड़ी हिस्सा लेने आ रहे हैं। ऐसे में स्टेडियम में पसरी गंदगी और नगर पंचायत का असहयोगात्मक रवैया न केवल खिलाड़ियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि इससे पूरे सोनभद्र और ओबरा की छवि भी धूमिल हो रही है। अब देखना यह होगा कि खिलाड़ियों के इस खुले आक्रोश और खुद झाड़ू उठाने की इस तस्वीर के बाद क्या जिला प्रशासन और नगर पंचायत के आला अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं, या फिर ऊर्जा की राजधानी के इस ऐतिहासिक मैदान को यूं ही बदहाली के आंसू रोने के लिए छोड़ दिया जाएगा।

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