22 वर्ष बाद कुवैत जेल से वतन लौटा खैरुल्लाह अंसारी।

पूर्वा टाइम्स -बेचन शर्मा

गोरखपुर। गुलरिया थाना अंतर्गत भटहट पुलिस चौकी के भटहट कस्बा निवासी डॉक्टर हरि राम शर्मा के सबसे छोटे पुत्र सत्येंद्र शर्मा का दुख भरी एक दास्तां है। जो 26 वर्ष की उम्र में कुवैत रोजी-रोटी के लिए गया। जहां वह चिकित्सा पैसे के सहायक के रूप में नियुक्त रहा। जिस कुवैत को इंजेक्शन लगाया उसको रिएक्शन हुआ और उसकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दवा का रिएक्शन डॉक्टर ने घोषित कर उसे 8 अप्रैल 2003 को जेल में बंद करा दिया । जबकि जो इंजेक्शन लगाया गया पांचवा था ।उस व्यक्ति को चार इंजेक्शन वही वह पहले लगा चुका था। कानूनी कार्रवाई चलती रही ।
घर वालों ने पैसा देकर वकील रखा जो मृत दंड को अपने बहस और दलील से आजीवन कारावास में तब्दील करा दिया। विगत रमजान महीने में वहां का गृह मंत्री जेल भ्रमण में कुवैत बांमटेट नामक जेल में आया ।
सबसे मिला।सबसे हाल-चाल पूछने के बाद पता चला कि कोई 35 वर्ष से बंद है ।
कोई 25 वर्ष से बंद है।
सत्येंद्र शर्मा भी 22 वर्षों से बंद रहा। गृह मंत्री शेख अहद यूसुफ का दिल फसीजा उसने एक कानून बनाया कि 20 वर्ष सजा काट रहे जेल में कैदियों की रिहाई कर दी जाए।
वह कानून मिश्री अल सफा नाम से पारित हुआ। रिहाई होने के बाद जून माह में वह अपने वतन घर आ गया 26 वर्ष की उम्र में उसने घर छोड़ा। आज भी वह अविवाहित जीवन जी रहा है ।माता जी फालिज की शिकार है।
जिनकी सेवा करता है। डॉक्टर साहब के तीन बच्चे थे धर्मेंद्र ,उपेंद्र और सत्येंद्र शर्मा
सबसे छोटा बालक अपने माता-पिता का यही रहा। वतन लौटने के बाद भी दुर्भाग्य उसका साथ नहीं छोड़ा। छोटे लड़के जो भीख मांगते हैं इसकी मोबाइल चोरी कर लिये जो बाद में मिल गया ।कोई इसका लगभग ₹10,000 और वोटर आईडी कार्ड चोरी कर लिया ।पाकिट मारों में भटहट आगे है। अब अपना वह आधार कार्ड बनवाने की फिराक में लगा है ।उसकी दास्तां एक अजीब दिल दहला देने वाली है। डॉ राम हरि शर्मा बेटे के वियोग में 12 वर्ष पहले स्वर्गवासी हो गए हैं।

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