लेखक, संसार के समानांतर अपनी एक अलग दुनिया रचता चलता है: प्रोफेसर राजवंत राव

साहित्य और समाज, दोनों को एक-दूसरे की जरूरत: प्रोफेसर राजवंत राव

उर्दू विभाग की दीवार पत्रिका “जुस्तजू” के द्वितीय अंक का विमोचन

पूर्वा टाइम्स समाचार

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में “जुस्तजू” नामक त्रैमासिक दीवार पत्रिका के द्वितीय अंक का विमोचन हुआ। पत्रिका का अनावरण उर्दू विभाग के अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रोफेसर राजवंत राव द्वारा किया गया। गौरतलब है कि ‘जुस्तजू’ का संपादन एवं प्रकाशन एमए तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों द्वारा किया गया है।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर राव ने कहा कि दीवार पत्रिका विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति की जिम्मेदारी व विवेक के साथ ही रचनात्मक भाव पैदा करती है। दीवार पत्रिका को लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक कहा जा सकता है, जहां छात्र और छात्राएं सहजता से अपने विचार प्रकट करते हैं। साहित्यकार, इस संसार के समांतर अपनी एक अलग और खूबसूरत दुनिया पैदा करता है। उन्होंने साहित्य और समाज के रिश्ते पर रोशनी डालते हुए कहा कि समाज और साहित्य में अटूट रिश्ता होता है। दोनों को एक दूसरे की जरूरत है। बिना साहित्य के एक स्वस्थ समाज की कल्पना संभव नहीं। साहित्यिक चेतना का महत्व निर्विवाद रूप से स्थापित है.

उर्दू विभाग के सहायक आचार्य डॉ. महबूब हसन ने कहा कि पत्रिका “जुस्तजू” छात्र- छात्राओं की रचनात्मकता का एक मंच है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास के साथ साथ साहित्य के प्रति रुचि पैदा होगी। विभाग के छात्रों की यह पहल स्वागत एवं बधाई योग्य है। सहायक आचार्य डॉ.साजिद हुसैन अंसारी ने कहा कि छात्रों के इस नवाचार से विभाग में निश्चित तौर पर साहित्यिक वातावरण मजबूत होगा। अन्य विद्यार्थी भी इससे प्रेरित होंगे.

कार्यक्रम का संचालन एम ए तृतीय सेमेस्टर के छात्र मु.राफ़े और धन्यवाद ज्ञापन संजू वर्मा ने किया। इस अवसर पर विभाग के शोधार्थी और स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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