योगी सरकार में प्रयोगों से निखर रही बच्चों की प्रतिभा, सोनभद्र के 26 परिषदीय स्कूलों में स्थापित हुईं लर्निंग बाय डूइंग लैब

रटने के बजाय करके सीख रहे कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थी, विज्ञान-गणित से लेकर कृषि, पर्यावरण और पोषण तक की गतिविधियों से विकसित हो रही व्यावहारिक समझ –

पूर्वा टाइम्स – ब्यूरो

सोनभद्र -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा अभियान के तहत सोनभद्र के 26 परिषदीय विद्यालयों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ (करके सीखना) लैब स्थापित की गई हैं। इन लैबों में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ प्रयोग और गतिविधियों के जरिए सीखने का अवसर मिल रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक क्षमता, रचनात्मकता और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित करना है, ताकि पढ़ाई उनके लिए अधिक रोचक और जीवन से जुड़ी बन सके।
प्रयोगों से समझ रहे विज्ञान, गणित और तकनीक के सिद्धांत
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मंशा के अनुरूप विद्यार्थियों को गतिविधि आधारित शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। लर्निंग बाय डूइंग लैब इसी दिशा में उपयोगी साबित हो रही हैं। विद्यार्थी यहां विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान, गणित और तकनीकी विषयों को व्यावहारिक रूप से समझ रहे हैं। इससे कक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाने में मदद मिल रही है। उन्होंने बताया कि इन लैबों में इंजीनियरिंग एवं वर्कशॉप, ऊर्जा एवं पर्यावरण, कृषि एवं बागवानी तथा स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी गतिविधियां कराई जाती हैं। विद्यार्थी औजारों की पहचान, मापन और मॉडल निर्माण के साथ बीज अंकुरण, जैविक खाद तैयार करने, जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे विषयों को करके सीखते हैं। इन गतिविधियों से उनमें टीमवर्क, अनुशासन, आत्मविश्वास और श्रम के प्रति सम्मान जैसे गुण विकसित करने पर भी जोर दिया जाता है।
कपड़ों की रंगाई से सीखा अनुपात, पाक-कला से समझे गणित के सिद्धांत
लर्निंग बाय डूइंग लैब में पढ़ाई को दैनिक जीवन से जोड़ने के लिए व्यावहारिक गतिविधियां कराई जा रही हैं। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के अनुसार, हाल ही में दुद्धी विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय दीघुल में विद्यार्थियों ने टाई एंड डाई तकनीक से कपड़ों की रंगाई की। इस गतिविधि के माध्यम से उन्होंने अनुपात, सममिति और रंगों के व्यवहार को समझा। वहीं, कंपोजिट विद्यालय अमोली प्रथम में पाक-कला गतिविधि के दौरान बच्चों ने सामग्री का वजन, अनुपात, स्वच्छता और खाद्य पदार्थों में गर्मी से होने वाले बदलावों के बारे में सीखा। इस तरह विद्यार्थी केवल पुस्तकों में पढ़े गए सिद्धांतों तक सीमित रहने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन की गतिविधियों से जोड़कर समझने का प्रयास कर रहे हैं।
शिक्षकों को भी प्रशिक्षण, कक्षा में बढ़ेगी बच्चों की भागीदारी
जिलाधिकारी ने बताया कि गतिविधि आधारित शिक्षण में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहती। वे विद्यार्थियों को स्वयं प्रयोग करने, सवाल पूछने और अपने निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित करते हैं। इस पद्धति को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों को भी आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे लैब में होने वाली गतिविधियों को कक्षा शिक्षण से बेहतर ढंग से जोड़ सकें। इन प्रयासों से विद्यार्थियों को भविष्य में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के लिए बेहतर आधार मिल सकेगा। योगी सरकार की मंशा के अनुरूप परिषदीय विद्यालयों में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
व्यावहारिक शिक्षा से भविष्य की तैयारी
सोनभद्र के 26 परिषदीय विद्यालयों में स्थापित लर्निंग बाय डूइंग लैब विद्यार्थियों को प्रयोगों के माध्यम से सीखने का अवसर दे रही हैं। विज्ञान, गणित, कृषि, पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों के जरिए बच्चों में विषयों को समझने, समस्याओं के समाधान खोजने और मिलकर काम करने की क्षमता विकसित करने पर जोर है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप यह प्रयास शिक्षा को अधिक सहभागितापूर्ण और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *