मनरेगा बचाओ व अन्य मांगों को लेकर खेत मजदूर यूनियन और भाकपा कार्यकर्ताओं ने राजमार्ग से नारेबाजी के साथ जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट पर किया जोरदार धरना- प्रदर्शन।
भी.बी. जी रामजी योजना को बताया ग्रामीण मजदूरों को दास बनाने की योजना और इसे रद्द करने किया मांग।
धरना प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सोनभद्र का जल,जंगल, जमीन बचाओ और यहां आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना कराओ की भी उठाया आवाज।
पूर्वा टाइम्स – समाचार
सोनभद्र, मंगलवार को उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मनरेगा बचाओ और राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत अपने विभिन्न मांगों के समर्थन में राजमार्ग से जोरदार नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गांधी उद्यान पहुंच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और जोरदार प्रदर्शन करते हुए धरना दिया । जहां वक्ताओं ने कहा कि..
यह सबसे बड़ी त्रासदी है कि आजादी के महानायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर दुनियां की सबसे बड़ी ऐतिहासिक योजना मनरेगा, जिसके तहत ग्रामीण गरीब मजदूरों को गांव में ही काम मिल रहा था । जिसको तमाम क़ुर्बानियों और शहादतों के बाद खेत मजदूरों ने हासिल किया था। मनरेगा योजना में मजदूरों को काम और बेरोजगारी भत्ता की गारंटी के साथ ही सारे अधिकार ग्राम सभाओं को मिला हुआ था। मौजूदा भारत सरकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से इतनी नफरत है कि मनरेगा को समाप्त करके ” विकसित भारत — रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी ( ग्रामीण) योजना को कानूनी रूप देकर मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना की हत्या कर रही है। ज्ञात रहे कि ” VB — G RAM (G ) योजना 01 जुलाई 2026 को कानूनी शक्ल अख्तियार कर लेगी। ऐसी स्थिति में 23 जून 2026 को खेत मज़दूर साथियों द्वारा “निर्णायक रूप” से हथौड़ा चलाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।
“मनरेगा” योजना में 90 प्रतिशत बजट का धन भारत सरकार और 10 प्रतिशत बजट का धन राज्य सरकारें बहन करती थी , फिर भी सभी को 100 दिन काम नहीं मिल पाता था, उसके ठीक विपरीत ” VB — G RAM (G ) , ” विकसित भारत — रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी ( ग्रामीण) योजना में भारत सरकार को 60 प्रतिशत ओर प्रान्तीय सरकारों को 40 प्रतिशत बजट की व्यवस्था करनी होगी, जाहिर है कि प्रान्तीय सरकारें पूरी तरह कर्जों तले दबी हुई हैं, ऐसे में प्रान्तीय सरकारें धन की व्यवस्था नहीं कर पायेंगी और भारत सरकार 60 प्रतिशत बजट से अतिरिक्त बजट की व्यवस्था नहीं करेगी। दूसरी बात है कि नये कानून के तहत भारत सरकार कृषि कार्य के समय पूरे दो महीने तक काम बन्द रखेगी और सारा अधिकार ग्राम सभाओं से छीनकर भारत सरकार ने अपने अधिकार में ले लिया है। परिणाम होगा कि ” भी बी जी राम ( जी) योजना धन के अभाव में अन्तिम सांस लेने लगेगी और भाजपा सरकार को इस योजना को बन्द करने का बहाना मिल जाएगा और देश के करोड़ों ग्रामीण खेत मजदूर किंकर्तव्यविमूढ़ होकर तमाशा देखता रह जाएगा, ऊनकी आजीविका छिन जाएगी और भाजपा सरकार की मजदूरों को गुलाम बनाने की साजिश सफल हो जाएगी।
धरना प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति महोदया के नामित १५ सुत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। जिसमें निम्न प्रमुख मांगे रहीं।
01 — भी बी — जी राम ( जी) योजना को जनहित को ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
02 — मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना को पुराने रुप में अविलम्ब बहाल किया जाए।
03 — सभी ग्रामीण खेत मजदूरों को वर्ष में 200 दिन काम और 700 रुपए प्रतिदिन न्यूनतम गारंटीशुदा मजदूरी दिया जाए।
04 — सभी ग्रामीण खेत मजदूरों को योजना के तहत काम न मिलने की स्थिति में बेकारी भत्ता की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाए।
05 — सभी खेत मजदूरों को 55 वर्ष की उम्र के बाद न्यूनतम 6000 रुपए मासिक पेंशन की व्यवस्था किया जाए।
06 — मनरेगा योजना में भारत सरकार और प्रान्तीय सरकारों द्वारा दिए जाने वाले पुराने बजट व्यवस्था को बदस्तूर जारी रखने के साथ ही जाब कार्ड को ध्यान में रखते हुए 250 लाख करोड़ का बजट जारी किया जाए।
07 — सभी ग्रामीण खेत मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित किया जाए।
08 — सभी ग्रामीण खेत मजदूरों को उनके प्राकृतिक संसाधनों जल, जंगल, जमीन को वापस किया जाए।
09 — धारा 132 की जमीनों उसर, बंजर, ग्राम सभा की जमीनों पर बसे हुए और काबिज लोगों को बेदखल न किया जाए। उस पर खेत मजदूरों को मालिकाना हक दिया जाए।
10 — सभी खेत मजदूरों को पक्का आवास के लिए 15 डिसमिल जमीन देने के साथ ही आवास के लिए 05 लाख रुपए दिया जाए।
11 — सभी ग्रामीण खेत मजदूरों को कृषि के लिए पर्याप्त जमीन आवंटित किया जाये।
12 — मर्जर, पेयरिंग और बन्द किए जा रहे प्राथमिक विद्यालयों पर अविलम्ब रोक लगाया जाए।
13 — स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्व विद्यालयों में पिछड़े, दलितों, आदिवासियों पर किये जा रहे भेदभाव पर रोक लगाने के साथ विश्वविद्यालय गाइड लाइन्स को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
14— विंध्य कैमूर पर्वत मालाओं के मध्य स्थित “आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र” में छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए “कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय” की स्थापना कराई जाए।
15 — जनपद सोनभद्र में स्थापित सभी कल कारखानों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के साथ रोजगार दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाए।
कार्यक्रम के समापन के अंत में कार्यकर्ताओं ने लखनऊ कोचिंग सेंटर हादसे पर दुःख जताते हुए दो मिनट का मौन रख मृतक किशोरों के प्रति शोक व्यक्त कर श्रद्धांजलि अर्पित किया ।
इस दौरान प्रमुख रूप कामरेड आर के शर्मा, कामरेड बसावन गुप्ता, कामरेड अमरनाथ बिंद, कामरेड रामभजन कुशवाहा, कामरेड नन्दू यादव, कामरेड नागेन्द्र कुमार, राम सुरत खरवार, शंभू खरवार, राम जतन खरवार, लालती देवी, हिरकुंवर, ऋतु कुमारी, देवकुमारी, संगीता, राजकुंवर, फुलबसिया, मोहरमानिया, महेंद्र सिंह, राजाराम, बुद्धि राम खरवार, जगरनाथ बैगा, कमला प्रसाद, शिव प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा, रामधनी व धन्नूराम आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता कामरेड राम रक्षा ने और संचालन कामरेड देव कुमार विश्वकर्मा ने किया।









