पितृपक्ष 18 सितम्बर से प्रारम्भ, 2 अक्टूबर को होगा अमावस्या तिथि का श्राद्ध

पूर्वा टाइम्स समाचार
गोरखपुर। युवा जनकल्याण समिति द्वारा संचालित श्री हनुमत ज्योतिष सेवा संघ के संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पं. बृजेश पाण्डेय के अनुसार इस बार भाद्रपद शुक्लपक्ष पूर्णिमा 18 सितम्बर दिन बुधवार को प्रात: 8 बजकर 41 मिनट पर ही समाप्त हो जा रही है तत्पश्चात पितृपक्ष आरम्भ हो जा रहा है.
संघ के ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पितृपक्ष का श्राद्ध अपरान्ह ब्यापिनी किया जाता है इस आधार पर प्रतिपदा का भी 18 सितम्बर बुधवार को किया जाएगा तथा इसी दिन से पितरों के लिए तर्पण इत्यादि प्रारंभ हो जाएगा. द्वितीया तिथि का श्राद्ध 19 सितम्बर,तृतीया तिथि का श्राद्ध 20 सितम्बर,चतुर्थी तिथि का श्राद्ध 21 सितम्बर को है,इसी क्रम में सभी तिथियों का श्राद्ध करें। अष्टमी तिथि का श्राद्ध एवं जिवत्पुत्रिका व्रत 25 सितम्बर बुधवार को किया जाएगा,26 सितम्बर को जिवत्पुत्रिका व्रत का पारण तथा मातृनवमी श्राद्ध किया जाएगा,28 सितम्बर को इन्दिरा एकादशी व्रत एवं एकादशी तिथि का श्राद्ध होगा,1अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध एवं शस्त्र इत्यादि से मरे हुए का श्राद्ध करें, 2अक्टूबर को अमावस्या तिथि का श्राद्ध,अज्ञात तिथी वालो का श्राद्ध व पितृ विसर्जन कर महालया की समाप्ति होगा। पं बृजेश पाण्डेय ने यह भी बताया कि पितृपक्ष में विशेषकर पितरों के प्रसन्नता के लिए तन-मन-धन से श्रद्धा पूर्वक श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करतें है,अगर घर में देवी देवताओं के पूजा पाठ करने या कराने से लाभ नही मिल रहा या परेशानी दूर नही हो रही तो समझे पितर नाराज है,उनके प्रसन्नता के लिए श्राद्ध करना ही उत्तम मार्ग है.पण्डित जी ने यह भी कहा कि अगर कुंडली में पितृदोष,कालसर्प दोष,शत्रु से परेशान हैं तथा रोग ब्याधि पीछा नही छोड़ रहा है तो पितृपक्ष में इन सभी कष्टों के निवारण हेतु जपदान अवश्य करावें शांति मिलेगी और सभी कार्य बनेंगे। अगर संतान उत्पन्न होने में भी परेशानी है तो पितरों की शांति अवश्य कराकर लाभ प्राप्त कर सकते है,पितृपक्ष में राहु,केतु, नवग्रह शांति,नारायणबलि, त्रिपिंडी श्राद्ध,बगलामुखि मंत्र का जप,महामृत्युंजय मंत्र का जप,विष्णु सहस्रनाम पाठ,शांति पाठ कराना अति लाभदायक होता है।








