इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला ‘शांति भंग’ में निर्दोषों को जेल भेजने वाले पुलिस अफसरों पर गिरेगी गाज
अवैध हिरासत पर ₹25,000 प्रतिदिन मुआवजा दोषी पुलिस अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाएगा जुर्माना
गोरखपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला बेवजह जेल भेजने पर पुलिस अफसर भरेंगे हर्जाना। शांति भंग के नाम पर कमिश्नरेट के अधिकारी लोगों को जेल भेज रहे हैं। अब भुगतेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब पुलिस अधिकारी केवल “शांति भंग की आशंका” का हवाला देकर किसी नागरिक को मनमाने ढंग से जेल नहीं भेज सकते। कोर्ट ने कहा कि कानून का दुरुपयोग कर नागरिकों की स्वतंत्रता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है तो उसकी जिम्मेदारी तय होगी और संबंधित अधिकारियों को इसकी कीमत अपनी जेब से चुकानी पड़ सकती है। अदालत ने इस मामले में पुलिस कमिश्नर, प्रयागराज को 14 सितंबर 2026 तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश भी दिया है।








